Sunday, June 14, 2026
Google search engine
Homeराज्यबिहार / झारखण्डझारखंड के 80 स्कूलों का भविष्य अधर में, नई मंजूरी का इंतजार...

झारखंड के 80 स्कूलों का भविष्य अधर में, नई मंजूरी का इंतजार जारी

 रांची
 झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी आदर्श विद्यालय योजना का भविष्य अधर में लटक गया है। सितंबर 2025 में योजना की अवधि समाप्त होने के बाद से अब तक इसे आगे बढ़ाने की मंजूरी नहीं मिली है।

इसका सीधा असर राज्य के 80 सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस (एसओई) के संचालन पर पड़ रहा है। सितंबर 2026 में योजना बंद हुए एक वर्ष पूरा हो जाएगा, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।

योजना के बंद रहने के कारण सीबीएसई से संबद्ध इन विद्यालयों को संचालन के लिए नियमित फंड नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन, विद्यालयों में शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में कठिनाइयां बढ़ती जा रही हैं।

सीबीएसई मान्यता प्राप्त होने के कारण समय पर परीक्षाओं का आयोजन, छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकों का वितरण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना अनिवार्य है, लेकिन फंड की कमी के कारण इन कार्यों में लगातार बाधा आ रही है।

हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में नौवीं और 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों के पास राशि नहीं थी। इसके बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) ने दूसरे मद से करीब 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान कर पुस्तक आपूर्तिकर्ता को राशि उपलब्ध कराई, तब जाकर छात्रों को किताबें मिल सकीं।

छह माह से वेतन नहीं, कर्मचारी छोड़ रहे हैं विद्यालय
फंड संकट का सबसे बड़ा असर स्कूलों में कार्यरत मानव संसाधन पर पड़ा है। जानकारी के अनुसार, राज्य के 80 एसओई में कार्यरत 30 स्कूल मैनेजर, 240 अन्य कर्मी और तीन राज्य स्तरीय पीएमयू अधिकारी पिछले करीब छह महीनों से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, बोकारो और गोड्डा सहित कई जिलों के स्कूल मैनेजर इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं कई अन्य मैनेजर भी जल्द नौकरी छोड़ने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि लगातार छह माह तक वेतन नहीं मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

100 नए एसओई की घोषणा, लेकिन पुराने स्कूलों का भविष्य अनिश्चित
कर्मचारियों और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि एक ओर राज्य सरकार आदर्श विद्यालय योजना के तहत 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस शुरू करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर पहले से संचालित 80 विद्यालयों के लिए योजना का नवीनीकरण तक नहीं हो पाया है।

इससे सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। योजना को आगे बढ़ाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक है। प्रस्ताव को विभिन्न स्तरों से स्वीकृति मिलने के बाद ही इसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जा सकेगा। ऐसे में पूरी प्रक्रिया में अभी कई महीने और लग सकते हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments