Sunday, October 4, 2026
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राजस्थान पंचायत चुनाव: सीएम भजनलाल के तूफानी दौरे और कांग्रेस की रणनीति से बदला सियासी पारा

जयपुर
राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त सबसे बड़ी हलचल ग्रामीण अंचलों से सामने आ रही है, जहां शहरी निकाय चुनावों के परिणाम आने के बाद अब सारा फोकस पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों पर टिक गया है। चुनाव की तारीखों के आधिकारिक ऐलान से ठीक पहले प्रदेश की दोनों प्रमुख सियासी पार्टियों- भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने गांवों की सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए अंदरखाने अपनी पूरी ताकत झोंकना शुरू कर दिया है। दोनों ही दलों की इस अचानक बढ़ी सक्रियता ने राज्य की ग्रामीण राजनीति में एक नया और दिलचस्प रोमांच पैदा कर दिया है, जिससे हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार गांवों का ऊँट किस करवट बैठेगा।

जमीनी स्तर पर राजनीतिक तापमान तेजी से उबल रहा है और दोनों दल कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों और मजबूत संगठन तंत्र के बल पर गांवों में सेंध लगाने की फिराक में है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी अपनी पुरानी रणनीतियों को दरकिनार कर पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में उतर चुकी है। इस छिपी हुई रस्साकशी और गुप्त रणनीतियों के बीच आइए जानते हैं कि आखिर चुनावी घोषणा से ठीक पहले गांवों की सियासत के इन परदे के पीछे क्या कुछ पक रहा है।

पंचायती राज के रण में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और पार्टी का पूरा संगठन तंत्र इस वक्त मैदान में सक्रिय हो चुका है। रणनीतिक रूप से उठाए गए एक बड़े कदम के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महज कुछ ही दिनों के अंतराल में राज्य के 19 जिलों का ताबड़तोड़ दौरा कर डाला।

इन दौरों का मकसद केवल सरकारी योजनाओं का लोकार्पण या शिलान्यास करना भर नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा सियासी संदेश छिपा था—सीधे तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर जमीनी फीडबैक लेना।

इन तूफानी दौरों में ब्यावर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, भरतपुर, खैरथल-तिजारा, कोटा, झालावाड़, अजमेर, बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर, फलोदी, सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे संवेदनशील जिले शामिल रहे।

सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के पांच दिग्गज नेताओं ने भी राज्य के 23 जिलों और विभिन्न संगठनात्मक जोन में कमान संभाल रखी है।

राधा मोहन दास अग्रवाल: राष्ट्रीय महामंत्री एवं राजस्थान प्रभारी ने खैरथल-तिजारा, अलवर, भरतपुर और दौसा में गुप्त और महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकें कीं।

मदन राठौड़: प्रदेश अध्यक्ष ने टोंक, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा और राजसमंद का दौरा कर जमीनी तैयारियों के पेंच कसे।

अन्य वरिष्ठ नेता: प्रदेश सह प्रभारी विजया राहटकर, राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी और संगठन महामंत्री अजय कुमार ने भी मोर्चे पर डटकर अंदरूनी हालात की समीक्षा की।

कांग्रेस की रणनीति: जिलों और संभागों में घेराबंदी
दूसरी ओर, हालिया नगरीय निकाय चुनावों के नतीजों से सबक लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और चुनाव की घोषणा से पहले ही संगठन को पूरी तरह एक्टिव मोड में ला दिया है। पार्टी ने इस बार केवल कागजी बैठकों के बजाय सीधे धरातल पर उतरकर जिला और संभाग स्तर पर विशाल सभाएं करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इन सभाओं में पार्टी के तमाम शीर्ष और कद्दावर नेता खुद शिरकत करेंगे, ताकि कार्यकर्ताओं के मुरझाए चेहरों में नया जोश भरा जा सके और उन्हें चुनावी वैतरणी पार करने के लिए तैयार किया जा सके।

इस आक्रामक रणनीति की शुरुआत नागौर के डेगाना से हो चुकी है, जिसके बाद बीकानेर में भी शक्ति प्रदर्शन किया गया। पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से चार अलग-अलग चरणों में ऐसे कार्यक्रमों का पूरा खाका तैयार किया है। कांग्रेस के प्रमुख चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट सहित तमाम दिग्गज नेता अलग-अलग जिलों और संभागों में जाकर न केवल कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर रहे हैं, बल्कि टिकट वितरण और संभावित प्रत्याशियों को लेकर अभी से अंदरखाने गुणा-भाग बिठाने में जुट गए हैं।

आमने-सामने के दावे और सियासी रोमांच
मैदान में उतरी दोनों ही पार्टियों के बयानों से साफ जाहिर है कि इस बार का पंचायत चुनाव किसी जंग से कम नहीं होगा। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का दावा है कि राज्य और केंद्र सरकार के विकास कार्यों और अनुशासित संगठन की बदौलत ग्रामीण जनता एक बार फिर भगवा पर ही भरोसा जताएगी।

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का पलटवार है कि गांवों की जनता मौजूदा सरकार की कार्यशैली से त्रस्त है और जनता का यह छिपा हुआ गुस्सा इस चुनाव में बड़ा उलटफेर करेगा। बहरहाल, आचार संहिता लगने से ठीक पहले इन राजनीतिक चालों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का पंचायती राज चुनाव बेहद रोमांचक और कड़े संघर्ष वाला होने वाला है।

 

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