Tuesday, September 22, 2026
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Jantar Mantar Protest: पूछताछ में बड़ा खुलासा, पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों ने पेट्रोल बम हमले की बनाई थी साजिश

नई दिल्ली
 जंतर-मंतर पर 26 जुलाई की सुबह का मंजर आम दिनों से अलग था. पिछली रात प्रदर्शन खत्म हो चुका था, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती जारी थी. इसी बीच पंजाब पुलिस की जांच में एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. अमृतसर से पकड़े गए कथित पाकिस्तान ISI आतंकी मॉड्यूल से जुड़े आरोपियों से पूछताछ में जंतर-मंतर और दिल्ली का कनेक्शन सामने आने की बात कही गई है. जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें जंतर-मंतर पर पेट्रोल बम तैयार कर पुलिस, सेना और अन्य वर्दीधारी सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाने का टास्क दिया गया था. हालांकि इस पूरे दावे की दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अलग से जांच कर रही है। 

पूछताछ में आरोपी वंश कुमार ने कथित तौर पर दिल्ली ऑपरेशन की पूरी कहानी बताई है. उसके मुताबिक 25 जुलाई को देव सिंह उर्फ करण ने विशाल उर्फ गंगू को दिल्ली जाने का निर्देश दिया था. यात्रा के लिए एक दुकानदार के जरिए 2,000 रुपए की व्यवस्था की गई. इसके बाद 25 जुलाई की शाम करीब 7 बजे अमृतसर रेलवे स्टेशन पर वंश कुमार, विशाल उर्फ गंगू, रोहित, देव सिंह उर्फ करण और सुखदीप सिंह कथित तौर पर एकत्र हुए. करीब 7:30 बजे सभी ट्रेन से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए. जांच एजेंसियां अब इस दावे को CCTV और दूसरे तकनीकी सबूतों से मिलाने में जुटी हैं। 

नई दिल्ली स्टेशन से सीधे जंतर-मंतर पहुंचने का दावा
आरोपी के बयान के मुताबिक 26 जुलाई की सुबह करीब 6 बजे पूरा समूह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा. वहां से वे सीधे जंतर-मंतर गए. पूछताछ में दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर उत्तर प्रदेश का रहने वाला एक अज्ञात व्यक्ति उनसे मिला था. आरोपियों के मुताबिक इस व्यक्ति को पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर ने वहां भेजा था. इसी शख्स ने ग्रुप को आठ कांच की बोतलें दीं. आरोपियों का दावा है कि उन्हें इन बोतलों के जरिए पेट्रोल बम तैयार करने और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों, सेना के जवानों तथा दूसरे वर्दीधारी सरकारी अधिकारियों पर हमला करने का निर्देश दिया गया था। 

आठ बोतलें, पेट्रोल बम और फिर ऑपरेशन रोकने का दावा
पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद आरोपियों ने कुछ देर आपस में विचार-विमर्श किया. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर हमला करने से इनकार कर दिया. आरोपियों ने जांच एजेंसियों को बताया कि उन्होंने अपने पाकिस्तानी हैंडलर को फोन करके कहा कि वे पेट्रोल बम बनाने का सामान एक बेंच के नीचे छोड़ रहे हैं और अब इस साजिश का हिस्सा नहीं बनेंगे. इसके बाद सभी आरोपी उसी दिन ट्रेन से अमृतसर लौट गए. पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि जंतर-मंतर से वास्तव में कोई फोन कॉल पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर को किया गया था या नहीं। 

जंतर-मंतर से पाकिस्तान फोन का दावा, जांच में जुटी स्पेशल सेल
इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जांच तेज कर दी है. स्पेशल सेल की एक टीम फिलहाल अमृतसर में मौजूद बताई जा रही है और पंजाब पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों से जुड़ी जानकारी खंगाल रही है. जांच का एक बड़ा हिस्सा CCTV फुटेज पर टिका है. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से लेकर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों के सैकड़ों कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है. मकसद यह पता लगाना है कि आरोपियों का दिल्ली पहुंचना, जंतर-मंतर जाना और वहां किसी संदिग्ध व्यक्ति से मुलाकात का दावा फुटेज से मेल खाता है या नहीं। 

यूपी के संदिग्ध संपर्क से लेकर लोकल नेटवर्क तक जांच
जांच एजेंसियों के सामने सिर्फ जंतर-मंतर पहुंचने की पुष्टि करना ही चुनौती नहीं है. अब उस कथित उत्तर प्रदेश के व्यक्ति की पहचान भी अहम हो गई है, जिसका नाम पूछताछ में सामने आने की बात कही जा रही है. स्पेशल सेल यह पता लगाने में जुटी है कि वह व्यक्ति कौन था, क्या उसका आरोपियों से पहले से संपर्क था और क्या दिल्ली में कोई स्थानीय नेटवर्क मौजूद था. इसके अलावा मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, लोकेशन, CCTV फुटेज और दूसरे तकनीकी एवं फोरेंसिक साक्ष्यों को भी जोड़ा जा रहा है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के कथित पाकिस्तान कनेक्शन की वास्तविक प्रकृति क्या है। 

पुरानी गिरफ्तारी से खुला था जंतर-मंतर कनेक्शन
यह पूरा मामला पंजाब पुलिस की उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर आतंकी गतिविधियों की साजिश का खुलासा करने का दावा किया गया था. अमृतसर पुलिस के मुताबिक दो अलग-अलग गिरोहों से जुड़े कुल नौ लोगों को पकड़ा गया था, जिनमें चार नाबालिग भी बताए गए. पुलिस ने आरोपियों के पास से बोतल बम, पिस्तौल, कारतूस और अन्य संदिग्ध सामान बरामद होने का दावा किया था. इसी जांच के दौरान एक गिरोह से जुड़े आरोपियों के जंतर-मंतर पहुंचने की बात सामने आई थी. अब पूछताछ में सामने आई कथित टाइमलाइन इस कनेक्शन को और विस्तार दे रही है। 

सबसे बड़ा सवाल: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन खत्म था, फिर निशाना कौन?
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल 26 जुलाई की सुबह को लेकर है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन 25 जुलाई की रात तक खत्म हो चुका था. इसके बावजूद अगले दिन एहतियात के तौर पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान वहां ड्यूटी पर मौजूद थे. ऐसे में जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि अगर आरोपियों को वास्तव में जंतर-मंतर पर हमला करने का निर्देश दिया गया था, तो निशाने पर सिर्फ पुलिस और अर्धसैनिक बल क्यों थे. क्या यह टास्क किसी खास सुरक्षा व्यवस्था को देखकर दिया गया था या इसके पीछे कोई और मकसद था? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। 

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