भोपाल
हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत धर्म और आध्यात्म है। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की पक्षधर है। हमारा देश सारी दुनिया को परिवार मानने वाला देश है। हमारी यही ताकत भारत को विश्व गुरू बनाने के लिये मजबूती देती है। इस आशय के विचार प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने व्यक्त किए। उन्होंने संस्कारपूर्ण शिक्षा पर विशेष बल दिया। शुक्ल तुलसी मानस प्रतिष्ठान के स्वर्ण जयंती समारोह के समापन कार्यक्रम में मौजूद प्रबुद्धजनों को संबोधित कर रहे थे। मानस भवन में आयोजित हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की।
कार्यक्रम में जड़ेरूआ धाम के संत हरिदास जी महाराज, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, विधायक डॉ. सतीश सिकरवार तथा संस्थान के अध्यक्ष अभय पापरीकर व महेश मुदगल सहित अन्य पदाधिकारी मंचासीन थे।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि वर्तमान में दुनिया के कई राष्ट्रों में अराजकता पराकाष्टा की हद तक पहुँच रही है। ऐसे में पूरी दुनिया को परिवार मानने वाले देश यानि भारत के नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हमें जो आध्यात्मिक धरोहर व संस्कृतिक विरासत में मिली है, उसे न केवल संरक्षित बल्कि और पल्लवित करें। शुक्ल ने कहा युवा पीढ़ी आधुनिकता की ऊँची उड़ान अवश्य उड़े पर एक पाँव जमीन पर रखकर अपने मूल धर्म, आध्यात्म व संस्कृति का संरक्षण भी करे। प्रसन्नता की बात है ग्वालियर के तुलसी मानस प्रतिष्ठान जैसे संस्थान अच्छा काम कर रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रामचरित मानस आध्यात्मिक ज्ञान का प्रेरणाकुंज है। यदि रामचरित मानस को हम अपने मन में बसा लें तो हमारा कोई भी कदम गलत रास्ते पर नहीं जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि केवल शिक्षा प्राप्त करना पर्याप्त नही है, शिक्षा संस्कारवान होना जरूरी है। शिक्षा यदि संस्कारवान होगी तो युवा पीढ़ी भटकेगी नहीं और निश्चय ही हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुरूप साझा प्रयासों से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र यानि विश्व गुरू बनाने में सफल होंगे।
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि बुराईयों से निकलने का रास्ता आध्यात्म में निहित है। इसी भाव के साथ हमारे पूर्वजों ने तुलसी मानस प्रतिष्ठान की स्थापना की थी। खुशी की बात है कि इस संस्था ने अपने 50 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस संस्थान ने विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिये सराहनीय प्रयास किए हैं। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस को जन-जन तक पहुँचाने का काम किया है। यह एक ऐसा ग्रंथ है जिसके अध्ययन से हमारे भीतर विनम्रता, श्रृद्धा व कृतज्ञता स्वत: ही आ जाती है। उन्होंने 50 वर्ष की सफल यात्रा के लिये तुलसी मानस प्रतिष्ठान के पदाधिकारियों को बधाई व शुभकामनायें दीं। तोमर ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्था सनातन संस्कृतिक को अक्षुण्ण रखने में आगे भी योगदान देता रहेगा।
विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने तुलसी मानस प्रतिष्ठान में ग्रंथालय के विस्तार के लिये अपनी विधायक निधि से 5 लाख रुपए की धनराशि देने की घोषणा इस अवसर पर की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान पिछले 50 सालों से तुलसीदास जी के व्यक्तित्व व कृतित्व एवं रामचरित मानस को जन-जन तक पहुँचाने का काम कर रहा है।
पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि तुलसी मानस प्रतिष्ठान सामाजिक चेतना एवं लोगों में राष्ट्रभाव जागृत करने में महती भूमिका निभा रहा है। साथ ही धार्मिक एवं आध्यात्मिक जागरण का काम भी संस्थान द्वारा किया जा रहा है।
स्वागत उदबोधन तुलसी मानस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष अभय पापरीकर द्वारा दिया गया। कार्यक्रम में महेश मुदगल ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन रामबाबू कटारे ने किया।




