Saturday, August 22, 2026
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पेपर लीक मामले में प्रोफेसर समेत 6 गिरफ्तार, CG कृषि विश्वविद्यालय में मचा हड़कंप

रायपुर.

रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष के एंटोमोलॉजी विषय के पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस की जांच में पेपर लीक मामले में इनकी संलिप्तता पाई गई है.

दरअसल, 20 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी 28 कृषि महाविद्यालयों में B.Sc. कृषि द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर के AGCH-221 (कीटशास्त्र) विषय की परीक्षा होनी थी. परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले सुबह 8:41 बजे कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल पर प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली. इसके बाद करीब 8:54 बजे संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई. छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी WhatsApp के जरिए प्रश्नपत्र के कुछ प्रश्नों के कंटेंट वायरल होने की सूचना विश्वविद्यालय को दी. जांच में प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित होने की पुष्टि हुई. इसके बाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. एन.आर. रंगारे की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में अपराध दर्ज किया गया.

दुर्ग के अनुज मिंज से खुली पेपर लीक की कड़ी
जांच के दौरान पुलिस को दुर्ग निवासी अनुज मिंज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली. टीम ने दुर्ग पहुंचकर उसे पकड़ा और पूछताछ शुरू की. इसके बाद कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के जिलों में अलग-अलग टीमें भेजी गईं. पुलिस के मुताबिक, करीब 36 घंटे की लगातार जांच के बाद पेपर लीक के स्रोत और आरोपियों की पहचान कर ली गई.

प्रोफेसर ने लिफाफे में छेद कर बनाया पेपर का वीडियो
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया है, जो वर्ष 2019 से भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है. पिछले करीब एक साल से वह अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त कर उन्हें कॉलेज ले जाने का काम कर रहा था. 17 अगस्त को वह उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के लिए जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय, रायपुर पहुंचा था. वहां से उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए और सभी प्रश्नपत्रों के लिफाफे कॉलेज ले गया. हालांकि 20 अगस्त को होने वाले AGCH-221 के प्रश्नपत्र वाला लिफाफा वह अपने घर ले गया. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने घर पर लिफाफे के साथ छेड़छाड़ की. उसने सुई और नुकीले उपकरण की मदद से लिफाफे में छोटा सा छेद किया और मोबाइल कैमरा अंदर डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली. इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री की नकल तैयार की गई.

11 हजार रुपये में छात्रों को बेचा प्रश्नपत्र
पुलिस के अनुसार, योगेश सोनकेसरिया ने प्रश्नपत्र की सामग्री अपने कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को कुल 11 हजार रुपये में बेच दी. इसके बाद अजय नायक ने प्रश्नपत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचाया. इसी नेटवर्क के जरिए परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

6 आरोपी गिरफ्तार, 2 अभी फरार
पुलिस ने मामले में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के कब्जे से 11 हजार रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सुजा, कॉपी और फेविकोल बरामद किया गया है. पुलिस ने बताया कि मामले में संलिप्त 2 अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पेपर लीक में शामिल अन्य लोगों और उनकी भूमिका के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है.

गिरफ्तार आरोपियों के नाम
मामले में पुलिस ने कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया (38) निवासी सिवनी (मध्यप्रदेश), अजय नायक (20) निवासी बलौदाबाजार, त्रिदेव पटेल (22) निवासी महासमुंद, नितिन पाण्डेय (22) निवासी बस्तर, अनुज मिंज (22) निवासी जशपुर और आदित्य साहू (20) निवासी बालोद शामिल हैं.

जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसल,  इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की गई थी. प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे. परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित होने की शिकायत सामने आई थी. मामले की गंभीरता और परीक्षा की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी है. निरस्त परीक्षा सितंबर के प्रथम सप्ताह में पुनः आयोजित की जाएगी.

CM साय ने कड़ी कार्रवाई का दिया था आश्वासन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.

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