Friday, September 11, 2026
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NFSA 2013 के 13 साल: उपलब्धियों और चुनौतियों पर राष्ट्रीय स्तर पर हुई अहम चर्चा

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013: प्रगति, चुनौतियां और आगे की राह पर हुआ राष्ट्रीय सेमिनार

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग और मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित "राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013: प्रगति, चुनौतियां और आगे की राह" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार 21-22 जुलाई 2026 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सेमिनार में नीति-निर्माता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद, विकास भागीदार, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां ​​और देश भर से राज्य खाद्य आयोगों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य साक्ष्य-आधारित नीतिगत संवाद और आपसी सीख के माध्यम से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के कार्यान्वयन को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना था।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने की। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम को सामाजिक न्याय का आधार बताया, जो कमजोर नागरिकों के लिए सम्मान और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करता है। लगभग 28,000 से अधिक उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से 5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सेवा दी जा रही है। राजपूत ने नवाचारों की प्रमुख पहलों पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में "राशन आपके द्वार" (डोरस्टेप डिलीवरी) योजना, लाभार्थियों को SMS-आधारित अलर्ट, दिव्यांगजनों के लिए प्रॉक्सी राशन संग्रह और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में कठिनाइयों का सामना कर रहे बुजुर्ग नागरिकों के लिए विशेष सहायता योजना के बारे में बताया।

भारत के भविष्य के खाद्य ढांचे की रूपरेखा मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रो. वी.के. मल्होत्रा ​​ने प्रस्तुत की और इसके बाद विशिष्ट अतिथि प्रो. रमेश चंद (विशिष्ट प्रोफेसर, इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस – ICRIER, और नीति आयोग के पूर्व सदस्य) ने अपने विचार रखे। इसके बाद हुए तकनीकी सत्रों में संरचनात्मक चुनौतियों, वित्तीय स्थिरता और प्रौद्योगिकी-संचालित आपूर्ति श्रृंखला सुधारों की समीक्षा की गई, जिसमें नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. योगेश सूरी ने महत्वपूर्ण जानकारियां प्रस्तुत कीं। संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम की सुनोज़ोमी हाशिमोटो; ICMR-नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन के डॉ. सी. साई राम; और फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया, इंस्टिट्यूट ऑफ़ रूरल मैनेजमेंट आनंद (IRMA) और नेशनल लॉ स्कूल के प्रतिनिधि शामिल थे। चर्चाओं में मध्य प्रदेश में PDS के पूरी तरह से कंप्यूटराइज़ेशन, लाभार्थियों के 96 प्रतिशत e-KYC पूरे होने, आइरिस-इनेबल्ड e-PoS डिवाइस लगाने, समग्र ID के साथ इंटीग्रेशन और 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (ONORC) पहल के तहत पोर्टेबिलिटी की सुविधा जैसे अहम पहलुओं पर बात हुई।

कॉन्फ़्रेंस के दूसरे दिन पब्लिक हेल्थ के साथ तालमेल, दूसरे राज्यों से सीखने वाले मॉडल और फ़ूड सिक्योरिटी को मज़बूत करने के लिए शिकायत निवारण सिस्टम पर चर्चा की गई। टेक्निकल सेशन के दौरान, मध्य प्रदेश सरकार में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि,  नेशनल हेल्थ मिशन की सीनियर जॉइंट डायरेक्टर डॉ. अर्चना मिश्रा और यूनिसेफ़ के फ़ील्ड ऑफ़िस चीफ़ विलियम हैनलोन जूनियर ने NFHS-6 डेटा में दिख रही बच्चों की सेहत से जुड़ी गंभीर चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। इन चुनौतियों में ज़्यादा कुपोषण, 'स्टंटिंग' और माताओं में एनीमिया शामिल हैं। उन्होंने एक ऐसी मल्टी-सेक्टरल रणनीति की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जिसमें "पहले 1,000 दिनों" और "कैश-प्लस" मॉडल (जिसमें कैश ट्रांसफ़र के साथ व्यवहार में बदलाव लाने वाली बातचीत शामिल हो) को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही उन्होंने हेल्थ, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और खाद्य विभागों के बीच तालमेल बिठाने के लिए विशेष सेल बनाने की भी बात कही। पंजाब, मेघालय, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ के स्टेट फ़ूड कमीशन के चेयरपर्सन ने संस्थागत तालमेल, डिजिटल गवर्नेंस, न्यूट्रिशन-सेंसिटिव इंटरवेंशन, शिकायत निवारण और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े नए और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले मॉडल पेश किए। कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी इन चर्चाओं में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

समापन सत्र में अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने पार्टनर संस्थाओं और राज्यों के साथ मिलकर फ़ूड सिक्योरिटी को एक टिकाऊ, पोषक तत्वों से भरपूर और न्यायपूर्ण व्यवस्था में बदलने के लिए विभाग की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने पारंपरिक फ़ूड सिक्योरिटी से न्यूट्रिशन सिक्योरिटी की ओर बढ़ने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और दालों, मोटे अनाजों (मिलेट्स) और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ फ़ूड बास्केट में विविधता लाने के महत्व को रेखांकित किया।

कॉन्फ़्रेंस का समापन इस व्यापक सहमति के साथ हुआ कि स्टेट फ़ूड कमीशन को मज़बूत किया जाए। अलग-अलग सेक्टरों के बीच तालमेल को बढ़ावा दिया जाए। लाभार्थियों के डेटाबेस को आधुनिक बनाया जाए और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही, खाद्य अधिकारों के मामले में "किसी को भी मना न करने" (नो-डिनायल) के नज़रिए को बनाए रखने और फ़ूड सिक्योरिटी से न्यूट्रिशन सिक्योरिटी की ओर बढ़ने के सामूहिक संकल्प पर भी सहमति बनी। मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग ने नेशनल फ़ूड सिक्योरिटी एक्ट, 2013 को ज़्यादा असरदार और समावेशी ढंग से लागू करने के लिए कॉन्फ़्रेंस की सिफ़ारिशों को व्यावहारिक नीतिगत उपायों में बदलने के लिए मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग और पार्टनर संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

 

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