निवेश और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित होगा न्यू नोएडा, औद्योगिक विस्तार को मिलेगी नई रफ्तार
योगी सरकार के निवेश-अनुकूल माहौल का असर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ेगी गतिविधियां
मजबूत कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से नोएडा को मिलेगी ग्लोबल इंडस्ट्रियल हब की नई पहचान
सेमीकंडक्टर, एआई और बैटरी तकनीक जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर जोर, न्यू नोएडा बनेगा नई औद्योगिक अर्थव्यवस्था का आधार
नोएडा/लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया के प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में नोएडा औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। योगी सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर का असर अब नोएडा के विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना के रूप में दिखाई दे रहा है। औद्योगिक मांग में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्राधिकरण लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ‘न्यू नोएडा’ विकसित करने की तैयारी कर रहा है।
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के अनुसार, इस विस्तार से औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलने के साथ वर्ष 2030 तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5 से 6 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। वहीं, आगामी पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) में नोएडा अथॉरिटी के करीब ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट शामिल होंगे। इसमें डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
औद्योगिक विस्तार को मिलेगी नई दिशा
प्राधिकरण के सीईओ करुणेश ने बताया कि वर्ष 1976 में दिल्ली के निकट औद्योगिक नगरी के रूप में स्थापित नोएडा आज उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता, बेहतर बुनियादी ढांचे और मजबूत कनेक्टिविटी के कारण यहां विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्यिक गतिविधियों में लगातार निवेश बढ़ा है। मौजूदा शहरी क्षेत्र में भूमि की उपलब्धता सीमित होने के कारण अब ‘न्यू नोएडा’ के विकास की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जल्द ही चरणबद्ध तरीके से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार मौजूदा नोएडा क्षेत्र में अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत विकल्पों पर भी काम कर रही है।
न्यू नोएडा के विकास से औद्योगिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होगी और नए निवेशकों को आधुनिक औद्योगिक आधारभूत सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे विनिर्माण, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को और गति मिलने की उम्मीद है।
₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट्स धरातल पर
मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अनुसार, आगामी पांचवें ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) में नोएडा से जुड़े करीब ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतरेंगे। इनमें डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। योगी सरकार द्वारा लगातार आयोजित किए जा रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नोएडा में प्रस्तावित ये परियोजनाएं इसी निवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी।
तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
न्यू नोएडा के साथ कनेक्टिविटी को भी विस्तार देने की योजना है। शहर को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा से जोड़ने के लिए तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर पर योजना बनाई जा रही है। इनके जरिए नोएडा को बोड़ाकी के मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब, बॉटनिकल गार्डन और चार मूर्ति के रास्ते गौर सिटी से जोड़ने का प्रस्ताव है। नोएडा पहले से ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित मेट्रो कनेक्टिविटी से आवागमन और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
168 सेक्टरों में फैला मजबूत औद्योगिक आधार
करीब 20 हजार हेक्टेयर में फैला नोएडा 168 सेक्टरों में विभाजित है और इसका लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र विकसित हो चुका है। पिछले तीन दशकों में यहां करीब 9,500 औद्योगिक, 5,000 वाणिज्यिक और 250 से अधिक संस्थागत आवंटन किए गए हैं। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप पिछले 30-35 वर्षों में 12 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। अब न्यू नोएडा के विस्तार के साथ रोजगार और निवेश के इस आधार को और व्यापक बनाने की तैयारी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी निर्यात में बड़ी हिस्सेदारी
नोएडा का उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में करीब 10 प्रतिशत योगदान है। राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत, जबकि परिधान निर्यात में करीब 80 प्रतिशत बताई जाती है। नोएडा में सैमसंग, डिक्सन, टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल, माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो और एडोबी जैसी प्रमुख कंपनियों की मौजूदगी ने इसे देश के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों में स्थापित किया है। डेटा सेंटर क्षेत्र में सिफी और अडानीकनेक्स के निवेश से भी नोएडा के तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूती मिली है।




