Friday, June 19, 2026
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राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए चार चरणों में सत्यापन प्रक्रिया, सभी डिपो की भौतिक जांच भी शामिल

करनाल
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने प्रदेशभर में उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन डिपो का विशेष सत्यापन अभियान शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों, सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारियों और खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षकों को अगले चार दिनों के भीतर सभी राशन डिपो का रिकॉर्ड सत्यापित कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार से इसकी शुरुआत होगी।

सरकार की ओर से इस अभियान का उद्देश्य विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध राशन डिपो से संबंधित जानकारी को पूरी तरह शुद्ध, प्रमाणित और अद्यतन करना है, ताकि भविष्य में सरकारी नीतियां बनाने, योजनाओं के संचालन और प्रशासनिक निर्णय लेने में सही एवं विश्वसनीय आंकड़ों का उपयोग किया जा सके। प्रदेश भर में राशन के करीब 9081 डिपो हैं। इनमें से करीब 9060 मैप भी किए जा चुके हैं। जबकि जिले में करीब 656 राशन डिपो हैं। इनसे करीब 4.72 लाख लोग राशन ले रहे हैं। अब इन सभी की जांच की जाएगी।

फैमिली आईडी का भी होगा मिलान
सत्यापन के दौरान प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान यानी डिपो की वर्तमान स्थिति की जांच की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित डिपो वर्तमान में सक्रिय, रद्द, निलंबित (या स्वेच्छा से सरेंडर किया जा चुका है। अगर पोर्टल पर दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो उसे तत्काल अपडेट किया जाएगा।

विभाग ने केवल डिपो की स्थिति की जांच तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं रखी है। सत्यापन के दौरान प्रत्येक डिपो धारक की परिवार पहचान पत्र, पीपीपी यानी फैमिली आईडी और उसके परिवार के सदस्यों के विवरण का भी मिलान किया जाएगा। इससे विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद व्यक्तिगत जानकारी की भी पुष्टि हो सकेगी और भविष्य में किसी प्रकार की विसंगति की संभावना कम होगी।

चार चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
विभाग ने सत्यापन के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली तय की है। सबसे पहले संबंधित क्षेत्र का खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक यानी आईएफएस अपने अधिकार क्षेत्र के सभी राशन डिपो का भौतिक एवं रिकॉर्ड सत्यापन करेगा और रिपोर्ट तैयार कर संबंधित सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी यानी एएफएसओ को भेजेगा। इसके बाद एएफएसओ रिपोर्ट की जांच कर अपनी टिप्पणियां दर्ज करेगा और उसे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के पास भेजेगा। डीएफएससी पूरे मामले की समीक्षा करने के बाद रिकॉर्ड को स्वीकृत या अस्वीकृत करेगा। जिन रिकॉर्ड को मंजूरी मिलेगी, उन्हें विभाग का क्लीन और प्रमाणित डेटा माना जाएगा, जबकि जिन मामलों में कोई त्रुटि मिलेगी, उन्हें दोबारा सत्यापन के लिए संबंधित निरीक्षक के पास भेज दिया जाएगा।

अधिकारी के अनुसार
विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सभी अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अगले चार दिनों के भीतर सत्यापन, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर लें। विभाग का मानना है कि शुद्ध और प्रमाणित डेटा उपलब्ध होने से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड अपडेट रहेगा और भविष्य में योजनाओं के बेहतर संचालन तथा नीतिगत निर्णय लेने में आसानी होगी। -मुकेश कुमार, खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, करनाल।

 

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