Saturday, June 20, 2026
Google search engine
Homeराज्यउत्तर प्रदेशचंदा पारदर्शिता को लेकर राम जन्मभूमि ट्रस्ट को तीन दिन का नोटिस

चंदा पारदर्शिता को लेकर राम जन्मभूमि ट्रस्ट को तीन दिन का नोटिस

अयोध्या
अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों यानी महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज (अध्यक्ष), श्री चंपत राय (महासचिव) और स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज (कोषाध्यक्ष) को लीगल नोटिस मिला है.

'तीन दिनों में दें सारा ब्योरा'
इस नोटिस में ट्रस्ट से कहा गया है कि वे नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर, वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच मिले दान और किए गए खर्च का पूरा और साल-दर-साल ब्योरा दें. इसमें ऑडिट की गई बैलेंस शीट, आय-व्यय का विवरण, ऑडिटर की रिपोर्ट, ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई ज़मीन की जानकारी, बैंक खाते की जानकारी और FCRA के तहत मिले किसी भी विदेशी योगदान का ब्योरा शामिल होना चाहिए. ये नोटिस बिहार के बक्सर से RJD के मौजूदा सांसद सुधाकर सिंह ने उन्हें भेजा है.

'नोटिस पूरी तरह से जनहित में जारी'
एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने कहा, 'यह नोटिस पूरी तरह से जनहित में जारी किया गया है, न कि किसी राजनीतिक, पक्षपाती या व्यक्तिगत मकसद से. ट्रस्ट भारत और विदेशों में लाखों भक्तों द्वारा दिए गए सार्वजनिक चंदे को एक ट्रस्टी (अमानतदार) के तौर पर संभालता है. जहां जनता का पैसा शामिल हो, वहां पारदर्शिता और जवाबदेही कोई एहसान नहीं है. ये हर दानदाता और आम जनता के प्रति एक जिम्मेदारी है.'

इधर, सांसद सुधाकर सिंह ने कहा, 'मेरी चिंता बस यह पक्का करने की है कि भक्तों द्वारा नेक नीयत से दिए गए फंड का हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से हो. ज़मीन की खरीद, ऑडिट की गई जानकारी न देने और खर्च में पारदर्शिता की कमी को लेकर लगातार खबरें और चिंताएं सामने आती रही हैं. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80G के तहत रजिस्टर्ड और जनता का पैसा संभालने वाले ट्रस्ट की यह जिम्मेदारी है कि वह जनता को साफ और वेरिफाई करने लायक हिसाब दें. मुझे उम्मीद है कि ट्रस्टी इसे टकराव का मामला मानने के बजाय ज़रूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देंगे.'

क्या कुछ है नोटिस में
  इस नोटिस में इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट, 1882, इनकम टैक्स एक्ट, 1961, उत्तर प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 का ज़िक्र किया गया है. ये कानून पब्लिक धार्मिक ट्रस्ट के ट्रस्टियों पर सही अकाउंटिंग और जानकारी देने की जिम्मेदारी डालते हैं. इसमें मद्रास हाई कोर्ट के हालिया फैसले (आर. थिरुमुरुगन बनाम आर. थेन्नारासु और अन्य, 21 नवंबर 2025) का भी हवाला दिया गया है. इस फैसले में कहा गया था कि किसी पब्लिक धार्मिक संस्था को दिया गया दान ट्रस्टियों की निजी संपत्ति नहीं होता, बल्कि यह समुदाय के फ़ायदे के लिए होता है, और समुदाय को ऑडिट और पारदर्शिता की मांग करने का पूरा अधिकार है.

नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर तय समय के अंदर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो मामले को उचित कानूनी मंचों के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा. यह बात फिर से दोहराई जाती है कि जानकारी देने की यह मांग पब्लिक चैरिटेबल फंड और ऑडिट किए गए स्टेटमेंट से जुड़ी है. कानून के तहत, ट्रस्ट के लिए इन्हें बनाए रखना और मांगे जाने पर इन्हें पेश करना अनिवार्य है.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments