Friday, September 11, 2026
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गो संरक्षण विशेष: देशी गाय के पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पादों की विदेश में भारी डिमांड

लखनऊ. 
देश-दुनिया के लिए यूपी रोल मॉडल बनकर उभरा है। प्रदेश की देशी गायों के पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पाद अब अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों तक पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की नीति उत्तर प्रदेश को देश-विदेश में नई पहचान दिला रही है। यही नहीं, गो संरक्षण में यूपी देश का पथप्रदर्शक बन चुका है। इसी का परिणाम है कि गुजरात, केरल, हरियाणा समेत 15 राज्यों के लोग यूपी से गो संरक्षण सीख रहे हैं।

सात समंदर पार पहुंचे यूपी के दुग्ध उत्पाद
उत्तर प्रदेश में देसी गायों के जरिए तैयार किए जा रहे करीब 200 प्रकार के उत्पाद आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। पंचगव्य घृत, ब्राह्मी घृत, गोमूत्र अर्क, घनवटी, च्यवनप्राश, गो घृत, शतधौता घृत और आयुर्वेदिक काजल जैसे उत्पादों की मांग विदेश में लगातार बढ़ रही है।

अमेरिका, कनाडा, यूएई, सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सऊदी अरब और थाईलैंड समेत कई देशों में इन उत्पादों की पहुंच बनी है। प्राकृतिक जीवनशैली, आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रति बढ़ते आकर्षण ने यूपी के गो-आधारित उत्पादों के लिए नए बाजार तैयार किए हैं।

गोशाला से ग्लोबल मार्केट का सफर
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यहां गो संरक्षण को आर्थिक मूल्य से जोड़ा गया। अब गोबर, गोमूत्र, घी और पंचगव्य आधारित उत्पादों को व्यवस्थित उद्योग का स्वरूप दिया जा रहा है। इस बदलाव ने देसी गाय को केवल पशुधन नहीं, बल्कि ग्रामीण आय और उद्यमिता के स्रोत के रूप में स्थापित किया है। गांवों में स्वयं सहायता समूह, गोशालाएं और छोटे उद्यमी भी इस क्षेत्र से जुड़कर आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

आईटी इंजीनियर ने दिखाई नई राह
गाजियाबाद के असीम रावत ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद देसी गायों के संरक्षण और उनसे जुड़े उत्पादों के निर्माण का क्षेत्र चुना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से शुरू हुई उनकी पहल आज 'हेता (HETHA)' के रूप में देश और विदेश के बाजारों तक पहुंच चुकी है। असीम रावत का मानना है कि यदि देसी गायों के उत्पादों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर बाजार से जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

देशभर के लिए बना मॉडल
उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत 15 से अधिक राज्यों के लोगों को यहां असीम रावत प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके माध्यम से लोगों को गो संरक्षण की बारीकियां सिखाई जाती हैं। गो संरक्षण, नस्ल सुधार और गो आधारित उत्पादों के व्यावसायिक मॉडल को समझने के लिए लगातार अन्य राज्यों के दल प्रदेश का दौरा कर रहे हैं।

साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण पर विशेष जोर : मुकेश मेश्राम
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार उन्नत देसी नस्ल की गायों के पालन के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और  थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं ने डेयरी और गो आधारित उद्योग को नई गति दी है, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिली है।

आस्था के साथ अर्थव्यवस्था पर केंद्रित योजना
जिस देसी गाय को कभी आर्थिक बोझ माना जाता था, वही आज सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में करोड़ों रुपये की गो इकोनॉमी की धुरी बन रही है। यही वजह है कि गो संरक्षण का यूपी मॉडल अब देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है। गो संरक्षण को अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखने का परिणाम है कि यूपी का मॉडल अब दूसरे राज्यों के साथ ही अन्य देशों के लिए भी मिसाल बन रहा है।

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