Thursday, June 18, 2026
Google search engine
Homeराज्यबिहार / झारखण्डबिहार के हस्तशिल्प को मिली बड़ी उपलब्धि, बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया...

बिहार के हस्तशिल्प को मिली बड़ी उपलब्धि, बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया पेंटिंग को मिला GI टैग

पटना
बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के तीन विशिष्ट और पारंपरिक उत्पादों को भारत सरकार की ओर से भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग प्रदान किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस गौरवशाली सूची में नालंदा की विश्वप्रसिद्ध 'बावन बूटी साड़ी-फैब्रिक', गयाजी का अनूठा 'पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट' तथा भोजपुर की ऐतिहासिक 'पीढ़िया पेंटिंग' शामिल हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और बिहार सरकार के संयुक्त व अथक प्रयासों से बिहार की इस अनमोल हस्तशिल्प विरासत को यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुआ है। इस जीआई टैग के मिलने से अब इन पारंपरिक कलाओं से जुड़े स्थानीय बुनकरों, मूर्तिकारों और कलाकारों को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान और आर्थिक मजबूती मिलेगी।

पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के मार्गदर्शन से पूरी हुई पंजीकरण प्रक्रिया
इन पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और जीआई पंजीकरण की इस बेहद जटिल कानूनी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में देश के जाने-माने विशेषज्ञों का बड़ा योगदान रहा है। नाबार्ड ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि बिहार के इन तीनों उत्पादों के जीआई पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में वाराणसी के ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव और पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का अमूल्य मार्गदर्शन और विशेष तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। उनके कुशल दिशा-निर्देशन और वैज्ञानिक दस्तावेजों की तैयारी के कारण ही बिहार के इन तीन बेजोड़ शिल्पों को भौगोलिक संकेतक की सूची में शामिल कराना संभव हो पाया।

बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया पेंटिंग का बढ़ेगा दुनिया में मान
इस ऐतिहासिक टैग के मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब दुनिया भर के बाजारों में बिहार के इन तीनों विशिष्ट उत्पादों की प्रामाणिकता और शुद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकेगा। बौद्ध कला के प्रतीकों को समेटने वाली नालंदा की बावन बूटी साड़ी, पहाड़ों को तराशकर बनाई जाने वाली गयाजी की पत्थरकट्टी कला और भोजपुर की लोक परंपरा को दर्शाने वाली पीढ़िया पेंटिंग के नाम पर अब कोई भी नकली उत्पाद नहीं बेच पाएगा। कला समीक्षकों का मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल बिहार के पर्यटन और हस्तशिल्प उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नई पीढ़ी के स्थानीय युवाओं को भी अपने पारंपरिक रोजगार से जुड़ने की एक नई प्रेरणा मिलेगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments