Sunday, June 14, 2026
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दिल्ली में महंगी हो सकती है बिजली, ज्यादा खपत करने वालों की जेब पर पड़ेगी सीधी मार

नई दिल्ली
दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगने जा रहा है. दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने आज तीनों बिजली कंपनियों BRPL, BYPL और TPDDL को अप्रैल 2026 के लिए पावर पर्चेज एडजेस्टमेंट चार्ज (PPAC) नामक अतिरिक्त चार्ज वसूलने की अनुमति दे दी है। 

यह दिल्ली में पहला मासिक PPAC है. पहले यह हर तीन महीने में होता था. ऐसे में राजधानी में बिजली एक से 3.30 फीसदी महंगी हो सकती है. अब हर महीने बिजली की दरों की समीक्षा होगी. कहा जा रहा है कि 500 यूनिट से ज्यादा खर्च करने पर बढ़ा बिल आएगा. इसका 200-400 यूनिट खर्च करने वालों पर असर नहीं पड़ेगा. जून महीने में बिजली का बढ़ा बिल आएगा। 

PPAC क्या है?

PPAC बिजली बनाने वाली कंपनियों से बिजली खरीदने की लागत में हुई बढ़ोतरी को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का तरीका है. कोयला, ईंधन महंगा होने से बिजली खरीद महंगी हो गई थी. देश के 25 से ज्यादा राज्यों में पहले से ही यह चल रहा है. यह कानून और अदालत के आदेश के मुताबिक जरूरी है। 

इस बार कितना PPAC लगेगा?

-BRPL (दक्षिण दिल्ली): 17.94 फीसदी
– BYPL (पूर्वी दिल्ली): 17.43 फीसदी
-TPDDL (उत्तर और पश्चिम दिल्ली): 16 फीसदी
DERC ने कंपनियों की मांग से काफी कम अनुमति दी है.

आम दिल्लीवासियों पर क्या असर?
– इस बढ़ोतरी का सब्सिडी लेने वाले यानी 200 से 500 यूनिट तक का लाभ लेने वालों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. दिल्ली सरकार की सब्सिडी यूनिट्स पर आधारित है, बिल की रकम पर नहीं इसलिए बिल में PPAC से कोई बढ़ोतरी नहीं होगी. ज्यादा बिजली खर्च करने वाले या सब्सिडी से बाहर वालों के अप्रैल के बिजली बिल में सात से 18 फीसदी तक अतिरिक्त सरचार्ज लग सकता है। 

क्या कहता है नया नियम ‘F’

इससे आगे के महीनों में अगर कोई राशि छूट गई तो उसे बाद में धीरे-धीरे वसूल किया जाएगा.

क्यों लिया गया यह फैसला?
बिजली कंपनियों (DISCOMs) को जनरेटरों को समय पर पैसे चुकाने पड़ते हैं. अगर PPAC न लिया जाए तो कंपनियों पर पैसे का संकट आ जाएगा, जिसका ब्याज का बोझ अंत में उपभोक्ताओं पर ही पड़ता. समय पर PPAC लेने से ब्याज का बोझ कम होता है। 

वहीं, पावर एक्सपर्ट बी एस वोहरा के मुताबिक, डीईआरसी ने डिस्कॉम्स (DISCOMs) को बिलिंग चक्र पर अधिकतम 10 फीसदी तक एफपीपीएसी (FPPAC) लगाने की अनुमति दी थी लेकिन हमेशा की तरह डिस्कॉम्स इससे भी अधिक वसूली चाहते हैं और हैरानी की बात है कि डीईआरसी बिना किसी सीएजी (CAG) ऑडिट के उपभोक्ताओं पर भारी बोझ डालते हुए इसकी अनुमति भी दे देता है। 

इसके अलावा, लगभग 38,500 करोड़ रुपये की नियामकीय परिसंपत्तियों का भारी बोझ भी उपभोक्ताओं से वसूल किया जाना है. यह दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं पर एक गंभीर वित्तीय भार है. दिल्ली सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर इसकी गहन समीक्षा करनी चाहिए। 

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