Thursday, June 18, 2026
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NCLT के आदेश से बढ़ी अनिल अंबानी की परेशानी, क्या दिवालियापन की ओर बढ़ रहा मामला?

मुंबई 

उद्योगपति अनिल अंबानी को एक बड़ा झटका लगा है। दरअसल, मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी। इस फैसले के साथ ही अंबानी के खिलाफ दिवालियापन प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

हालांकि, NCLT के फैसले के बाद अनिल अंबानी ने स्पष्ट किया है कि वे इस आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में चुनौती देंगे। अगर अनिल अंबानी का दिवालियापन प्रक्रिया मामला आगे बढ़ता है तो एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) नियुक्त किया जा सकता है, जो कानून के तहत उनकी व्यक्तिगत संपत्तियों का आकलन और नियंत्रण संभालने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

यह मामला करीब 1,200 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़ा है। SBI का दावा है कि अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और रिलायंस इंफ्राटेल को दिए गए कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। कंपनियों के कर्ज नहीं चुकाने के बाद बैंक ने गारंटी के आधार पर वसूली की कार्रवाई शुरू की थी।

इस पूरे प्रकरण पर अनिल अंबानी की ओर से बयान आया है। यह मामला साल 2016 का है, जो कथित रूप से दी गई एक विवादित व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है। अंबानी पक्ष का दावा है कि उन्हें इस फंड से कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं मिला था। मामला उस समय का है, जब भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन संबंधी प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं हुए थे। अंबानी के प्रवक्ता के मुताबिक NCLT का विस्तृत आदेश मिलने के बाद उनकी कानूनी टीम उसका अध्ययन करेगी और उपलब्ध कानूनी विकल्पों के तहत उचित मंच पर चुनौती देगी। उन्होंने भरोसा जताया कि अंबानी अपनी स्थिति को न्यायिक मंचों पर सफलतापूर्वक साबित करेंगे।

अमिताभ झुनझुनवाला पर सीबीआई का एक्शन
इस बीच, मुंबई की एक विशेष अदालत ने रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े एक कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के पूर्व प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला को सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है। झुनझुनवाला इससे पहले अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज एक मामले में न्यायिक हिरासत में थे।

इस मामले में कंपनी पर कथित तौर पर 2,929.05 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। सीबीआई के अनुसार, रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, उसके निदेशकों और अज्ञात सरकारी अधिकारियों ने मिलकर 31 बैंकों और वित्तीय संस्थानों के एक समूह (कंसोर्टियम) के साथ धोखाधड़ी की साजिश रची। इस समूह से कंपनी ने कुल मिलाकर लगभग 9,280 करोड़ रुपये का लोन लिया था।

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