Saturday, October 24, 2026
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सौरभ हत्याकांड में दोषियों की अपील, मुस्कान और साहिल ने मृत्युदंड के फैसले को दी चुनौती

मेरठ
 नीला ड्रम के नाम से चर्चित सौरभ हत्याकांड के दोषी साहिल और मुस्कान ने हाईकोर्ट में अपील कर निचली अदालत के मृत्युदंड के फैसले को चुनौती दी है।हालांकि, निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उनकी फांसी की सजा को अब तक हाईकोर्ट की स्वीकृति नहीं मिली है। वहीं, अमित हत्याकांड में फांसी की सजा पा चुके अमरदीप और रविता भी अपील की तैयारी कर रहे हैं। जेल प्रशासन को भी उनकी अपील के बारे में जानकारी मिल चुकी है।

ब्रह्मपुरी में तीन मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या कर शव को नीले ड्रम में सीमेंट से जमा दिया गया था। इस वारदात को सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने अंजाम दिया था। जिला जज की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर को मृत्युदंड सुनाया था।

कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को दी फांसी की सजा
अब दोनों जेल में बतौर कैदी रह रहे हैं। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने साहिल मुस्कान को फांसी की सजा सुनाई थी। 165 पन्नों के आदेश की मंजूरी लेने के लिए हाईकोर्ट में भिजवाया गया है। अभी तक हाईकोर्ट की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

गुरुवार को सीनियर अधिवक्ता सुशील शुक्ला की तरफ से मुस्कान और साहिल की तरफ से हाईकोर्ट में अपील की गई। सुशील शुक्ला ने बताया कि साहिल और मुस्कान ने उन्हें अपने अधिवक्ता की स्वीकृति प्रदान की है। उसके बाद ही हाईकोर्ट में निचली अदालत के निर्णय को चुनौती देने के लिए अपील कर गई है।

अभी तक सुनवाई की तिथि निश्चित नहीं हो सकी है। वहीं, अमित हत्याकांड में भी अपर जिला जज जयवीर नागर की तरफ से पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड दिया गया था।

उक्त दोनों दोषियों की तरफ से भी हाईकोर्ट में अपील की तैयारी की जा रही है। 12 अप्रैल 2025 की रात अमित की गला दबाकर हत्या की गई थी। घटना को हादसा दिखाने के लिए शव पर सांप छोड़ दिया गया था।

बेटी के बालिग होने तक मुस्कान को फांसी न दी जाए
कवयित्री अनामिका जैन अंबर और उनके पति, कवि सौरभ जैन, गुरुवार को जेल में मुस्कान से मिले। अनामिका ने कहा कि साहिल और मुस्कान का अपराध क्षमा करने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं एक मां हूं। मुस्कान की 10 माह की बच्ची को देखकर मन करता है कि आजीवन उसका पूरा खर्च उठाऊं। बच्ची का क्या अपराध है?”

अनामिका के मुताबिक, बच्ची के बालिग होने तक मुस्कान को फांसी की सजा नहीं मिलनी चाहिए। उसकी सजा उम्रकैद में भी बदली जा सकती है। उन्होंने कहा कि जेल में मुस्कान की आंखों में पश्चाताप का डर साफ दिखाई दे रहा था।

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