Sunday, October 18, 2026
Google search engine
Homeदेशमहाराष्ट्र में UCC बिल दिसंबर में हो सकता है पेश, शादी-तलाक और...

महाराष्ट्र में UCC बिल दिसंबर में हो सकता है पेश, शादी-तलाक और लिव-इन पर जनता से सुझाव मांगे गए

मुंबई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा या एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए 2029 की समय-सीमा तय की है। महाराष्ट्र में यूसीसी को लागू करने की तैयारी तेज हो चुकी है। यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाई गई समिति ने गुरुवार को अपनी वेबसाइट लॉन्च की और आम लोगों से इस पर राय मांगी है। वेबसाइट पर 37 सवाल दिए गए हैं। उनमें शादी, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार जैसे विषय शामिल हैं।

आपको बता दें कि यह कानून उत्तराखंड में पहले ही लागू हो चुका है। इस साल गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं में भी UCC बिल पास किए हैं। गुजरात और असम के बिलों को इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान ने भी ड्राफ्टिंग कमेटियां बना ली हैं। अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि दिसंबर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में UCC बिल पेश करने की कोशिश की जाएगी।

इन सवालों पर मांगी राय
समिति ने लोगों से जो सवाल पूछे हैं वह कुछ इस प्रकार हैं। क्या आप इस समय महाराष्ट्र में UCC लागू करने का समर्थन करते हैं? क्या इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन किए बिना लागू किया जा सकता है? क्या इससे कानूनी विवाद कम होंगे और कानूनी प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी बनेंगी? इन सवालों के जवाब में तीन विकल्प दिए गए हैं। हां, नहीं और कोई टिप्पणी नहीं।

लोगों से यह भी पूछा गया है कि क्या किसी शादीशुदा व्यक्ति को दूसरी शादी करने की अनुमति दी जानी चाहिए? क्या पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक विवाह समारोहों को बनाए रखा जाना चाहिए? क्या ऐसे रिश्तों की एक सूची होनी चाहिए जिनमें शादी करना वर्जित हो? क्या लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होना चाहिए? क्या ऐसे रिश्तों की शुरुआत और अंत के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होना चाहिए?

आपको बता दें कि 2022 में उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने UCC के लिए ड्राफ्ट कमेटी बनाई थी। अब तक बनी सभी UCC कमेटियों की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज जस्टिस रंजना देसाई ने की है। इन सभी प्रश्नावली में मुख्य रूप से शादी, तलाक, भरण-पोषण, विरासत, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उत्तराखंड में पूछे गए सवाल महाराष्ट्र के सवालों से काफी मिलते-जुलते हैं। महाराष्ट्र में एक से अधिक विवाह और मुसलमानों में प्रचलित हलाला की प्रथा से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।

आगे क्या होगा?
आम जनता से फीडबैक लेने के लिए पोर्टल 15 नवंबर तक खुला रहेगा। इस वेबसाइट पर व्यक्ति और संगठन अपने फीडबैक और विस्तृत सुझाव दे सकते हैं। इस समिति में बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज एस. जी. मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, सामाजिक कार्यकर्ता और पद्म श्री से सम्मानित रमेश पतंगे, शिक्षा विशेषज्ञ सुवर्णा रावल और उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह शामिल हैं। यह समिति पूरे राज्य में सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित करेगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments