Sunday, October 18, 2026
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जैसलमेर के तालाब बने प्रवासी पक्षियों और वन्यजीवों का सहारा, गांव वालों की एकजुटता से बची जल विरासत

लाठी (जैसलमेर)
 थार में बारिश कम हो तो पानी की चिंता बढ़ जाती है, लेकिन खेतोलाई गांव के तीन तालाब इस बार भी भरे हुए हैं। गांव के लिलोलाई, बोधकी और नई नाडी तालाब में कम बारिश के बाद भी पर्याप्त पानी है। इसके पीछे गांव के लोगों की मेहनत और तालाबों को संभालकर रखने की उनकी परंपरा है।

गांव के लोग इन तालाबों की देखरेख करते हैं और पानी को सहेजकर रखने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि कम बारिश के बावजूद तालाबों में पानी बना हुआ है। रेगिस्तानी इलाके में इन तालाबों का भरा रहना बड़ी बात है, क्योंकि यहां पानी की जरूरत इंसानों के साथ पशु-पक्षियों को भी रहती है। इन तालाबों से आसपास के वन्यजीवों और पक्षियों को भी पानी मिलता है। सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भी ये तालाब खास हैं। पानी मिलने से पक्षियों को राहत मिलती है और आसपास के प्राकृतिक माहौल को बनाए रखने में मदद मिलती है। खेतोलाई के ग्रामीणों ने मिलकर पुराने जलस्रोतों को सहेजने की परंपरा को आज भी कायम रखा है। उनकी कोशिश बताती है कि पानी बचाने के लिए तालाबों की देखभाल और सामूहिक प्रयास कितने जरूरी हैं। थार जैसे इलाके में ये तालाब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि गांव की पुरानी परंपरा और लोगों की मेहनत की पहचान भी हैं।

प्रवासी पक्षियों और वन्यजीवों का सहारा
थार में ये तालाब ग्रामीणों के साथ वन्यजीवों और पक्षियों के लिए भी पानी का प्रमुख स्रोत हैं। सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए इनका महत्व बढ़ जाता है। पानी की उपलब्धता से पक्षियों और वन्यजीवों को राहत और आसपास के प्राकृतिक परिवेश की जैव विविधता को बनाए रखने में भी मदद मिलती है। पर्यावरण प्रेमी पंकज विश्नोई के अनुसार, तालाबों में पानी की उपलब्धता पक्षियों और क्षेत्र में विचरण करने वाले वन्यजीवों के लिए अहम है। इनका संरक्षण मरुस्थलीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता को बनाए रखने में भी सहायक है।

सामूहिक प्रयासों से सुरक्षित जल विरासत
ग्रामीणों के आपसी सहयोग और नियमित देखरेख से सदियों पुरानी जल संरक्षण परंपरा कायम है। कम का वर्षा वाले थार क्षेत्र में ये तालाब पानी सहेजने की पारंपरिक समझ के साथ ग्रामीण जीवन और पशु-पक्षियों की जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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