Saturday, October 17, 2026
Google search engine
Homeराज्यमध्य प्रदेशतबादले और निलंबन के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति का मामला, MP हाई कोर्ट...

तबादले और निलंबन के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति का मामला, MP हाई कोर्ट पहुंचा विवाद

जबलपुर 
 अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश के पद से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता आर.के. श्रीवास ने जबरन रिटायर्ड किए जाने को नियमों के खिलाफ बताया. हाई कोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस मामले में न्याय मित्र की नियुक्ति की है। 

याचिका में ये दलीलें दी गईं
याचिकाकर्ता आर.के. श्रीवास ने याचिका में कहा "उन्होंने वर्ष 2000 में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था. वह वर्ष 2016 में उन्हें उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत कर जिला न्यायाधीश (प्रारंभिक स्तर) बनाया गया. डेढ साल बाद ही उन्हें अप्रैल 2018 में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया. मध्य प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा (भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 2017 के नियम 14, उप-नियम 2 के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति लागू करने के लिए संबंधित अधिकारी की सेवा के 10 वर्ष पूर्ण या उसकी आयु 50 वर्ष होनी चाहिए थी। 

डेढ़ साल में 4 तबादले किए
याचिका में कहा गया "यह नियम उन सेवा सदस्यों पर लागू होता है जिन्हें 2017 के नियमों की धारा 2(ह) में परिभाषित किया गया है. सिविल जज और मजिस्ट्रेट के रूप में उनके पिछले कार्यकाल को नहीं गिना जा सकता, क्योंकि वह निचली न्यायपालिका का हिस्सा थी. सत्र न्यायाधीश के रूप में डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान उनका 4 बार तबादला किया गया. इसके अलावा उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई और निलंबित कर दिया गया। 

नए सेवा नियम लागू करने पर आपत्ति
याचिका में कहा गया "अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने से ठीक एक महीने पहले, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1994 के सेवा नियमों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इन नियमों को बनाते समय उनसे परामर्श नहीं लिया गया था. इसके बाद नए सेवा नियम लागू किए गए, जो मार्च 2018 से प्रभावी हुए. नए नियमों के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक सेवा अवधि को 20 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष कर दी गयी परंतु आयु सीमा 50 साल को यथावत रखा गया था। 

मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को
याचिकाकर्ता का आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सके. निचली और उच्च न्यायपालिका में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान, उन्हें अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में बी या सी ग्रेड मिला, जिसका अर्थ है अच्छा या बहुत अच्छा होता है. याचिका के सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत श्रीवास्तव को न्यायमित्र नियुक्त किया. मामले की अगली सुनवाई 16 नवम्बर को होगी। 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments