Monday, October 12, 2026
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लाड़ली बहना जैसी योजनाओं पर बोले शिवराज सिंह चौहान, क्यों हर सरकार के लिए इन्हें जारी रखना होगा जरूरी?

भोजपुर 
मध्य प्रदेश में शुरू हुई लाड़ली बहना योजना के बाद अब देश की हर सरकार को महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता की योजनाएं बनानी पड़ रही हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन जिले के भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि यह योजना वर्तमान में मुख्यमंत्री ने जारी रखी है और भविष्य में भी हर सरकार को इसे जारी रखना पड़ेगा, क्योंकि यदि बहनें नाराज हो गईं तो किसी की खैर नहीं है। मध्य प्रदेश की इस पहल के बाद देश के विभिन्न राज्यों में लाड़की बहना और मैया सम्मान योजना जैसे अलग-अलग नामों से महिलाओं को वित्तीय सहायता दी जा रही है।

बहनों को उठानी पड़ती थी परेशानी
केंद्रीय मंत्री चौहान ने बचपन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने महिलाओं को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते देखा है। एक-दो हजार रुपये के लिए भी गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की बहनों को परेशानी उठानी पड़ती थी। इसी सोच के साथ उन्होंने लाड़ली बहना योजना की नींव रखी थी, ताकि महिलाओं के हाथ में आर्थिक ताकत आ सके। पैसे मिलने के बाद महिलाओं की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। अब घर में उनका सम्मान बढ़ा है और परिवार के सदस्य भी उनकी राय को महत्व देने लगे हैं।

चौहान ने कहा, महिलाओं के राजनीतिक दृष्टिकोण में भी बड़ा परिवर्तन आया है। पहले माना जाता था कि परिवार का मुखिया जिस दल को समर्थन देगा, घर की महिलाएं भी उसी दिशा में मतदान करेंगी। अब स्थिति बदल चुकी है और महिलाएं अपनी निर्णय क्षमता को पहचानकर खुद तय करती हैं कि किसे वोट देना है। उन्होंने एक घटना का उदाहरण भी दिया, जिसमें लाड़ली बहना योजना का लाभ लेने वाली महिला पर एक राजनीतिक दल को वोट देने का दबाव बनाया गया था और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई थी। उस मामले में उन्होंने स्वयं प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। 

महिलाओं ने की 3,000 रुपये देने की मांग
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं से पूछा कि लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली राशि कितनी होनी चाहिए। इस पर कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने 3,000 रुपये करने की मांग की। इस पर शिवराज ने कहा कि योजना की राशि धीरे-धीरे बढ़ाकर 3,000 रुपये की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने इस योजना को जारी रखा है और आने वाले समय में सरकारों को महिलाओं के हित में ऐसी योजनाएं चलानी होंगी। हालांकि, योजना की राशि कब बढ़ेगी और बढ़ोतरी किस चरण में होगी, इस बारे में उन्होंने कोई समयसीमा नहीं बताई।

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई योजना
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने बचपन से गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाओं को आर्थिक परेशानियों का सामना करते देखा है। कई महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। कभी 1,000 या 2,000 रुपये के लिए उन्हें पति या परिवार के दूसरे सदस्यों से पैसे मांगने पड़ते थे। कई महिलाओं के पास अपने मायके जाने तक के लिए पैसे नहीं होते थे।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की इसी स्थिति को बदलने के लिए लाड़ली बहना योजना शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं के हाथ में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाना था, ताकि वे अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें और आर्थिक फैसले लेने में आत्मनिर्भर बनें।

आर्थिक सहायता मिलने से परिवार में बढ़ा महिलाओं का सम्मान
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि योजना शुरू होने के बाद उन्होंने महिलाओं से पूछा था कि आर्थिक सहायता मिलने से उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आया है। उनके मुताबिक, कई महिलाओं ने बताया कि अब परिवार में उनका सम्मान बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की सास उनसे पहले के मुकाबले अधिक स्नेह से बात करने लगीं और पति भी उनकी राय तथा जरूरतों को ज्यादा महत्व देने लगे। शिवराज के अनुसार, यह योजना केवल पैसे देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की ताकत देने का भी प्रयास है।

दूसरे राज्यों में भी शुरू हुईं महिलाओं के लिए योजनाएं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना शुरू होने के बाद दूसरे राज्यों में भी महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की मांग बढ़ी। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ राज्यों में लाड़ली बहना, कहीं लड़की बहना और कहीं मंईयां सम्मान योजना जैसे नामों से महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। शिवराज ने कहा कि महिलाओं ने अपनी ताकत पहचान ली है। अब वे अपने अधिकारों और जरूरतों को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हैं।

महिलाएं खुद तय करती हैं कि किसे वोट देना है
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले यह माना जाता था कि परिवार का मुखिया या गांव का प्रभावशाली व्यक्ति जिस राजनीतिक दल का समर्थन करेगा, परिवार के दूसरे सदस्य भी उसी दल को वोट देंगे। महिलाओं के मतदान को लेकर भी ऐसी ही धारणा थी। उन्होंने कहा कि अब स्थिति बदल रही है और महिलाएं अपने फैसले खुद लेने लगी हैं। वे अपनी पसंद के उम्मीदवार और राजनीतिक दल को वोट देने का निर्णय स्वयं करती हैं।

इस दौरान उन्होंने एक महिला से जुड़ी घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि लाड़ली बहना योजना के बाद उस पर कांग्रेस को वोट देने का दबाव बनाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। शिवराज के मुताबिक, महिला के उनके पास पहुंचने के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई।

लाड़ली बहना के साथ लखपति दीदी अभियान पर भी जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महिलाओं को केवल सरकारी आर्थिक सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनका लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आमदनी बढ़ाना होना चाहिए। इसके लिए लखपति दीदी अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की सालाना आमदनी कम से कम एक लाख रुपये होनी चाहिए। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण, बैंक से सहायता और कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वे अपना कारोबार शुरू कर सकें।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इससे उनकी आय बढ़ेगी और वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अधिक योगदान दे सकेंगी।

किसानों की बिजली समस्या पर मुख्यमंत्री से करेंगे चर्चा
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने भोजपुर क्षेत्र में किसानों को हो रही बिजली और पानी की समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के बाद वह इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री से चर्चा करेंगे, ताकि क्षेत्र में किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।

उन्होंने किसानों को बेहतर खेती की तकनीक सिखाने की बात भी कही। शिवराज ने बताया कि किसानों के एक समूह को प्रशिक्षण के लिए भुवनेश्वर भेजा गया है। उनके आने-जाने, रहने और भोजन की व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसान अतिरिक्त खर्च की चिंता किए बिना नई तकनीक और खेती के बेहतर तरीकों को सीख सकें।

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