Wednesday, October 7, 2026
Google search engine
Homeराज्यपंजाबCBI की छापेमारी पर पंजाब सरकार ने खटखटाया HC का दरवाजा, 30...

CBI की छापेमारी पर पंजाब सरकार ने खटखटाया HC का दरवाजा, 30 बैग रिकॉर्ड ले जाने पर सवाल

चंडीगढ़.

ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (गमाडा ) और पंजाब सरकार ने सेक्टर-62 स्थित पीयूडीए भवन में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तलाशी एवं सर्वे कार्रवाई को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

याचिका पर आज मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ सुनवाई करेगी। मामला तत्काल सूची में लगाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 22 से 24 सितंबर के बीच चली कार्रवाई करीब 50 घंटे तक जारी रही। इस दौरान कार्यालय की विभिन्न मंजिलों को सील रखा गया और 30 से अधिक बैगों में सरकारी रिकॉर्ड ले जाए गए। जीमाडा का यह भी आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डाटा कापी अथवा क्लोन किया गया। याचिका के अनुसार प्रधान सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी दो रात तक कार्यालय परिसर में मौजूद रहे

238 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी से जांच शुरू होने का दावा
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि ईडी की कार्रवाई जिस मामले के आधार पर शुरू की गई, वह केंद्रीय जांच ब्यूरो की उस प्राथमिकी से संबंधित बताई गई जिसमें तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रवर्तकों से जुड़ी कथित 238 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी की जांच हो रही है। आरोप है कि कंपनी की धनराशि निजी लाभ के लिए इधर-उधर की गई। गमाडा और पंजाब सरकार का कहना है कि इस प्राथमिकी में न तो वे आरोपी हैं और न ही उनके किसी अधिकारी को आरोपी बनाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों को बिना वैधानिक अधिकार के कार्यालय में रोके रखा गया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार उनके मुख्यालय और कार्यालय करीब 50 घंटे तक ईडी की कार्रवाई के अधीन रहे, मंजिलों को सील किया गया और बड़ी मात्रा में रिकॉर्ड बाहर ले जाया गया। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डाटा कापी किया गया। गमाडा ने इसे अधिकारों के दुरुपयोग का मामला बताते हुए कहा है कि ऐसी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 62 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। याचिका में तलाशी और अधिकारियों को रोके रखने को कानून के विपरीत बताते हुए कहा गया है कि जीमाडा या उसके अधिकारियों का कथित अपराध से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

रिकॉर्ड चाहिए था तो मांगे जा सकते थे: गमाडा
याचिका में तर्क दिया गया है कि यदि गमाडा की फाइलों में दर्ज किसी लेन-देन का जांच से कोई संबंध था, तो कानून के तहत संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए विभाग को नोटिस दिया जा सकता था। इसके लिए पूरे कार्यालय में तलाशी और सर्वे करने की जरूरत नहीं थी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments