Sunday, September 20, 2026
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पंजाब-हरियाणा के बढ़ते तापमान पर चेतावनी, 52 साल के अध्ययन में सामने आया बड़ा बदलाव

अमृतसर.

पंजाब और हरियाणा के मौसम में आ रहे अप्रत्याशित बदलावों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए 52 वर्षों (1971 से 2022) के व्यापक अध्ययन के अनुसार, पंजाब और हरियाणा अत्यधिक गर्मी, भीषण लू और उमस भरे वातावरण के सबसे बड़े हॉटस्पॉट के रूप में उभरे हैं। पीयर-रिव्यू जर्नल 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी' में प्रकाशित इस शोध में सात अलग-अलग मौसमी संकेतकों को मिलाकर तैयार किए गए 'क्लाइमेट एक्सट्रीम्स इंडेक्स' के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। यह अध्ययन 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है।

इसे मुख्य लेखक थोटा मोहन हैं उनके साथ एम. राजीवन, स्मृतिश्री लेंका, के. निरंजन कुमार, पी. रोहिणी और ओ.पी. श्रीजीत ने इसे तैयार किया है। थोटा मोहन खुद राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) नोएडा, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पुणे और एट्रिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु से संबद्धित हैं। इस शोध में 1971 से 2022 तक के IMD के ग्रिडेड वर्षा और तापमान आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, जिसकी प्रवृत्तियों की पुष्टि मान-केंडल (Mann-Kendall) विधि से की गई है।

2000 के बाद बढ़ा अत्यधिक गर्मी का दायरा
अध्ययन के तथ्य बताते हैं कि वर्ष 2000 के बाद से पंजाब और हरियाणा में अत्यधिक गर्मी से प्रभावित भू-भाग का दायरा बढ़कर 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत या उससे अधिक हो गया है। इससे पहले के दशकों में यह दायरा बेहद कम हुआ करता था। अध्ययन के अनुसार, दिन का तापमान, ह्यूमिड हीट (उमस भरी गर्मी) और एक्सेस हीट फैक्टर (लू की गंभीरता) जैसे संकेतकों में देश के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में पंजाब और हरियाणा में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।

सघन सिंचाई और भूजल का बदला समीकरण
वैज्ञानिकों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों में सघन सिंचाई भी गर्मी के पैटर्न को प्रभावित कर रही है। मानसूनी या प्री-मानसून समय में जब सिंचाई का पानी कम पड़ता है, तो भूमि-सतह का अत्यधिक गर्म होना और हवा में मौजूद नमी मिलकर उमस भरी गर्मी को कई गुना बढ़ा देती है।इसके अलावा, घटती मृदा नमी और शुष्क हवाओं के प्रभाव से यह गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है।

रात के न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी से बढ़ा जोखिम
आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि पंजाब और हरियाणा में केवल दिन का ही नहीं, बल्कि रात का न्यूनतम तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। रात के समय में पर्याप्त शीतलन न होने के कारण मानव शरीर को गर्मी से राहत नहीं मिल पाती, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसके साथ ही, लगातार शुष्क रहने वाले दिनों (CDD) की संख्या में बढ़ोतरी ने कृषि, फसल चक्र और भूजल स्तर पर भी बुरा असर डाला है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: तत्काल कदम उठाने जरूरी
शोधकर्ताओं का मानना है कि पंजाब और हरियाणा में स्थानीय चरम मौसमी घटनाओं का दायरा जिस तेजी से व्यापक हो रहा है, उसे रोकने के लिए अब क्षेत्र-विशिष्ट अनुकूलन रणनीतियां अपनानी होंगी। इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र, जल प्रबंधन, कृषि नीतियों और बुनियादी ढांचे में तुरंत सुधार की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि क्लाइमेट एक्सट्रीम्स इंडेक्स का उपयोग हर साल परिचालन उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए ताकि बढ़ते मौसमी जोखिमों की समय रहते निगरानी की जा सके।

1971–2022 के डेटा के अनुसार बदलावों के मुख्य कारण:-

  • अधिकतम तापमान में वृद्धि: उत्तर-पश्चिम भारत में दिन के तापमान में सबसे तेज सकारात्मक वृद्धि दर दर्ज की गई है, जिससे अत्यधिक गर्मी के दिन बढ़ रहे हैं।
  • लू और हीट स्ट्रेस की अधिकता: हीट इंडेक्स और एक्सेस हीट फैक्टर में मजबूत बढ़ोतरी के कारण क्षेत्र में लगातार और तीव्र हीटवेव आ रही हैं।
  • सूखे और शुष्क दिनों में बढ़ोतरी: लगातार शुष्क दिनों की संख्या और मानकीकृत वर्षा-वाष्पोत्सर्जन सूचकांक में वृद्धि से क्षेत्र में सूखे जैसी स्थितियां और भू-जल तनाव बढ़ रहा है।
  • रात के तापमान में बदलाव: न्यूनतम तापमान के रुख और आर्द्रता में बदलाव के कारण रात के समय की गर्मी और ठंड के पेटर्न प्रभावित हो रहे हैं।
  • पश्चिमी विक्षोभ में अस्थिरता: पश्चिमी विक्षोभों के पैटर्न में बदलाव और मानसून ब्रेक स्पेल बढ़ने के कारण वर्षा का वितरण अनियमित हो रहा है।
  • मिट्टी की नमी और भूमि-सतह का गर्म होना: शुष्क जलवायु स्थितियों के साथ मिट्टी की नमी में कमी और भूमि-सतह के अधिक गर्म होने से स्थानीय मौसम में चरम स्थिति बन रही है।
  • सिंचाई और कृषि का प्रभाव: गहन सिंचाई के कारण वायुमंडलीय आर्द्रता और स्थानीय ऊर्जा संतुलन प्रभावित होता है, जिससे तापमान और हीट स्ट्रेस के स्तर में बदलाव आता है।
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