Sunday, September 20, 2026
Google search engine
Homeदेशविकसित भारत के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट जरूरी, राज्यों को जमीन-बिजली-लॉजिस्टिक्स सुधारने की...

विकसित भारत के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट जरूरी, राज्यों को जमीन-बिजली-लॉजिस्टिक्स सुधारने की सलाह

 नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने विकसित भारत के लिए ज्यादा प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की जरूरत पर जोर दिया है और कहा है कि सिर्फ सरकारी खर्च से विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने शनिवार को राज्यों और केंद्र के अधिकारियों और वित्त मंत्रियों से कहा, "हालांकि भारत का बचत आधार काफी बड़ा है और इसे और बढ़ाने की जरूरत है लेकिन विकसित भारत के लिए जरूरी निवेश जुटाने के लिए निजी पूंजी की बड़ी भागीदारी बहुत जरूरी होगी।"

'सिर्फ सरकारी खर्चे पर हासिल नहीं होगा लक्ष्य'
शुक्रवार को आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने भी ऐसी ही बातें कही थीं। बयान में कहा गया, "डीईए सचिव ने जोर दिया कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए जरूरी बड़े बदलाव को सिर्फ सरकारी बजट से पूरा नहीं किया जा सकता। निजी क्षेत्र से फंडिंग, नए तरह के फंडिंग के तरीके और सरकार के अलग-अलग स्तरों के बीच सहयोग अहम भूमिका निभाएंगे।"

केंद्र ने राज्यों को निवेश बढ़ाने के लिए कहा
अपनी तरह की इस पहली बैठक में नागेश्वरन ने कहा, "विकसित भारत, विकसित राज्यों पर निर्भर करता है।" केंद्र ने राज्यों से निवेश आकर्षित करने के प्रयास तेज करने को कहा। नागेश्वरन ने सुझाव दिया कि राज्यों द्वारा अपनाए गए तौर-तरीकों, नियमों को आसान बनाने की चल रही कोशिशों और विशेषज्ञों की सिफारिशों को आगे बढ़ाया जाए और उन्हें स्पष्ट जिम्मेदारियों और समय-सीमा के साथ साझेदारियों में बदला जाए।

उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में जब वैश्विक स्तर पर फाइनेंसिंग के अवसर उपलब्ध हों भारत को संसाधनों को जुटाने की गति बढ़ाते हुए अपनी दीर्घकालिक विकास यात्रा को जारी रखना चाहिए।

राज्यों के लिए बताईं प्राथमिकताएं
सरकार के मुख्य अर्थशास्त्री ने राज्यों के लिए तीन प्राथमिकताएं बताईं-
    जमीन, बिजली और लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता और असरदार सिंगल-विंडो क्लीयरेंस के जरिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के लिए अनुकूल माहौल बनाना।
    मजबूत प्रोजेक्ट-तैयारी पाइपलाइन और भरोसेमंद प्रोजेक्ट रिपोर्ट के जरिए इन्वेस्टमेंट की क्वालिटी बेहतर करना ताकि घरेलू और मल्टीलेटरल फंडिंग मिल सके।
    साथ ही विकास की संभावना वाले उन जिलों में क्रेडिट पहुंचाना जहां अभी तक पर्याप्त क्रेडिट नहीं पहुंचा है। वित्तीय बाधाओं के बावजूद राज्यों के अपने कैपिटल खर्च को बढ़ाना।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों को 2031-32 तक कैपिटल खर्च को GSDP के लगभग 2.4% से बढ़ाकर 3% करना चाहिए।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments