Thursday, September 10, 2026
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ब्राउन’ रिव्यू: करिश्मा कपूर की दमदार वापसी, लेकिन थ्रिलर में रह गई सस्पेंस की कमी

साइकोलॉजिकल थ्रिलर के दीवानों के लिए फैंस की फेवरेट लोलो (करिश्मा कपूर) लेकर आई हैं नई सीरीज 'ब्राउन'. 2016 में आई अभिक बरुआ की नॉवेल 'सिटी ऑफ डेथ' पर बेस्ड ये शो डायरेक्टर अभिनय देव ने बनाया है. पुलिस इंवेस्टिगेशन और ब्रूटल मर्डर मिस्ट्री को दिखाती इस 7 एपिसोड की सीरीज क्या आपको आखिर तक बांधे रखने का दम रखती है?

कहानी
कोलकाता के एक रसूखदार परिवार की बेटी के दर्दनाक मर्डर से शो शुरू होता है. सिर से धड़ अलग कर पीड़िता को मौत के घाट उतारा गया है. पूरे कोलकाता में सनसनी फैली है. हर तरफ दहशत का माहौल है. पुलिस पर मीडिया और पॉलिटिकल पार्टी की तरफ से आरोपी को पकड़ने का दबाव है. ऐसे में केस की कमान रीटा ब्राउन (करिश्मा), कोलकाता पुलिस फोर्स की डिटेक्टिव, को दी जाती है. रीटा के साथ इस केस पर अर्जुन सिन्हा (सूर्या शर्मा) काम करता है.

अपनी पर्सनल लाइफ के ट्रॉमा की वजह से रीटा डिप्रेशन और एल्कोहल से स्ट्रगल कर रही है. वो अतीत की यादों में डूबी रहती है. केस पर काम करते हुए उसे भी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है. कहानी में सस्पेंस तब आता है जब एक और लड़की की निर्मम हत्या होती है. रीटा ये मर्डर मिस्ट्री सुलझाते हुए दिल दहला देने वाले शॉक और दर्द से गुजरती है. क्या रीटा सभी चुनौतियों से लड़कर ये केस सुलझा पाती है? इसका जवाब आपको शो देखकर ही मिलेगा.

एक्टिंग
करिश्मा कपूर के टैलेंट पर हर किसी को भरोसा है. कोई भी रोल हो, वो हर किरदार में अपना बेस्ट ही देती हैं. रीटा ब्राउन के किरदार को उन्होंने बखूबी निभाया है. वो हर इमोशंस को स्क्रीन पर दिखाने में कामयाब रही हैं. इस रोल को करिश्मा ने पूरी तरह नॉन ग्लैमरस और नो मेकअप लुक के साथ प्ले किया है. सूर्या शर्मा ने इंस्पेक्टर अर्जुन सिन्हा के रोल में अच्छा काम किया है. वो करिश्मा को कॉम्पलिटमेंट करते नजर आए. सोनी राजदान ने करिश्मा की मां का रोल किया. वो जब भी स्क्रीन पर दिखीं अच्छी लगीं. जीशू सेनगुप्ता ने साइकेट्रिस्ट संदीप चक्रवर्ती के रोल में बैलेंस एक्ट किया. हालांकि उनका रोल थोड़ा और दमदार लिखा जा सकता था. मेकर्स ने उनके पोटेंशियल को यूज नहीं किया. हेलन ने करिश्मा की रिलेटिव बर्था का रोल किया. वो जब भी दिखीं सीन में फन वाइब ऐड करती नजर आईं. बाकी कलाकारों ने भी अपने पार्ट को अच्छे से प्ले किया. सिंगर शान कैमियो रोल में हैं.

कहां रही कमी?
सीरीज थोड़ी स्लो पेस में है. ब्राउन जैसे साइकोलॉजिकल और क्राइम थ्रिलर में मेकर्स की सबसे बड़ी जीत तब होती है, जब आखिर तक खूनी का पता ना चले. लेकिन ब्राउन में ये कोशिश फेल हुई है. क्लाइमैक्स से पहले ही निर्मम हत्याएं करने वाला वो खूनी कौन है, ये प्रेडिक्टिबल हो जाता है. ये इस शो का सबसे बड़ा ड्रॉबैक है. स्क्रीनप्ले धीमा है. शो के एपिसोड लंबे खींचे हुए लगते हैं. कहानी में ऐसे मोड़ कम हैं जो आपकी हवाइयां उड़ा दे.

क्यों देखें सीरीज?
क्राइम थ्रिलर के चाहने वालों के लिए ब्राउन वन टाइम वॉच है. सिनेमैटोग्राफी अच्छी है. कोलकाता की तंग गलियों, डार्कनेस, दुर्गा पूजा की वाइब को कैमरे पर खूबसूरती से दिखाया गया है. बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के पेस के साथ मैच करता है.करिश्मा के लिए ये शो देखा जा सकता है. एक्ट्रेस ने पूरा शो अपने कंधों पर चलाया है. उन्हें कॉप अवतार में देखा जा सकता है.

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