Wednesday, September 16, 2026
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क्या भारत बनेगा वीटो पावर वाला देश? रूस-चीन के समर्थन के बाद UN चीफ ने दिया बड़ा संकेत

नईदिल्ली 
दुनिया की राजनीति में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है और अब इसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े मंच पर भी सुनाई दे रही है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार और उसके विस्तार की मांग का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने साफ कहा कि आज की दुनिया 1945 वाली दुनिया नहीं है. तब जो आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक तस्वीर थी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है. ऐसे में वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी आज की दुनिया के हिसाब से बदलनी चाहिए. सबसे खास बात यह है कि गुटेरेस ने भारत का नाम लेकर कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग के सबसे आगे रहने वाले देशों में है. यानी जिस स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकार की मांग भारत लंबे समय से करता रहा है, उसे अब एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है. मामला यहीं खत्म नहीं होता. ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भी भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका देने की मांग का समर्थन दोहराया है. दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और इनके पास अभी वीटो अधिकार भी है. ऐसे में उनका भारत के पक्ष में खड़ा होना काफी अहम माना जा रहा है। 

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण को सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला बनने की बात कही थी. गुटेरेस ने भी इसी सोच को आगे बढ़ाया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र में ज्यादा ताकत मिलेगी या नहीं. असली सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के साथ वीटो का अधिकार भी मिलेगा?

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भारत की मांग को बताया अहम, दुनिया बदलने की दी दलील
एंटोनियो गुटेरेस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सुरक्षा परिषद के विस्तार को समय की जरूरत बताया. उनका कहना था कि मौजूदा संस्थागत ढांचा उस दुनिया को नहीं दर्शाता जिसमें हम आज रह रहे हैं. 1945 में जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, तब वैश्विक शक्ति संतुलन अलग था. आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है. गुटेरेस ने कहा कि बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को वैश्विक संस्थाओं में भी जगह मिलनी चाहिए. उन्होंने खास तौर पर कहा कि भारत इस मांग को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहा है। 

रूस-चीन ने भी भारत के लिए खोला बड़ा रास्ता
ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया. घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई है. इसमें सुरक्षा परिषद को ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और सक्षम बनाने की बात कही गई. साथ ही विकासशील देशों की सदस्यता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. चीन और रूस ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय मामलों में ज्यादा बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए. खासकर सुरक्षा परिषद में उनकी भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई है. भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन खुद सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। 

भारत को अभी वीटो नहीं मिला, लेकिन रास्ता जरूर मजबूत हुआ
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. गुटेरेस ने यह ऐलान नहीं किया है कि भारत को तत्काल वीटो अधिकार मिलने जा रहा है. सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत को स्थायी सदस्य बनाने की मांग का समर्थन जरूर किया गया है. मौजूदा व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्य हैं चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका. इन पांचों के पास वीटो अधिकार है. यह व्यवस्था 1945 में सुरक्षा परिषद की स्थापना के समय से चली आ रही है. भारत अगर भविष्य में स्थायी सदस्य बनता है तो वीटो का सवाल अलग से तय होगा. फिलहाल बड़ा घटनाक्रम यह है कि भारत की दावेदारी को वैश्विक दक्षिण, ब्रिक्स और अब संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की तरफ से भी मजबूत समर्थन मिलता दिख रहा है। 

PM मोदी ने कहा- वैश्विक दक्षिण सिर्फ नियम मानने वाला नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि विकासशील देशों को सिर्फ बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं रहना चाहिए. उन्हें नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. गुटेरेस के बयान को इसी दिशा में देखा जा रहा है. उनका कहना था कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. ऐसी स्थिति में वैश्विक संस्थाओं में भी संतुलन और समानता दिखाई देनी चाहिए. सुरक्षा परिषद में सुधार इसी बड़े बदलाव का हिस्सा हो सकता है। 

गुटेरेस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर गाजा तक दुनिया के सामने रखी चुनौती

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सिर्फ सुरक्षा परिषद सुधार की बात नहीं की. उन्होंने दुनिया के सामने मौजूद कई बड़ी चुनौतियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले वर्षों में विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है. लेकिन इसका फायदा फिलहाल कुछ कंपनियों और कुछ देशों तक ज्यादा सीमित है. अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की खाई आय, अवसर, सुरक्षा और संप्रभुता की खाई को और बढ़ा सकती है. उन्होंने विकासशील देशों के लिए वित्तीय मदद बढ़ाने की भी बात की। 

    गुटेरेस ने जलवायु न्याय का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने विकसित देशों से अपने वादे पूरे करने की अपील की. इसके अलावा उन्होंने गाजा, मध्य पूर्व, यूक्रेन और सूडान समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शांति की जरूरत बताई. उनका कहना था कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए। 

क्या भारत को मिलेगा वीटो? अब पूरी दुनिया की नजर इस सवाल पर
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की उसकी मांग नई नहीं है. अब उसे रूस और चीन का समर्थन मिला है. ब्रिक्स के मंच से भी आवाज मजबूत हुई है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी सुरक्षा परिषद में विस्तार की जरूरत को स्वीकार किया है. लेकिन स्थायी सीट और खासकर वीटो अधिकार हासिल करना अभी लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है. फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि भारत की दावेदारी पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वैश्विक मंच पर मौजूद है. दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है और इसी बदलाव में भारत अपनी भूमिका को और बड़ा करने की कोशिश कर रहा है। 

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