Monday, September 7, 2026
Google search engine
Homeराज्यमध्य प्रदेशश्वेता का प्लान B फेल या कामयाब? हनीट्रैप-2 में सबसे बड़े सबूत...

श्वेता का प्लान B फेल या कामयाब? हनीट्रैप-2 में सबसे बड़े सबूत की तलाश में पुलिस

इंदौर 

हनीट्रैप-2 को अंजाम देने की आरोपी श्वेता जैन ने अपने नए अपराध का पैटर्न भी पहले हनीट्रैप कांड की तरह ही रखा। हालांकि, इस बार वह पहले से सतर्क थी। श्वेता को अंदेशा था कि वह दोबारा पुलिस के शिकंजे में आ सकती है। यही वजह है कि उसने गिरफ्तारी की स्थिति के लिए एक बी-प्लान भी तैयार कर रखा था, ताकि उसके खिलाफ ज्यादा सबूत न मिल सकें और उसे जल्द जमानत मिल सके।

हनीट्रैप-2 से जुड़ी कथित रिकॉर्डिंग और कैमरा पुलिस अब तक बरामद नहीं कर पाई है। कोर्ट में पेश किए गए चालान के अनुसार, पुलिस को श्वेता के घर से पेन, स्पाई कैमरे और मेमोरी कार्ड मिले हैं, लेकिन इनमें कथित तौर पर ज्यादा रिकॉर्डिंग नहीं मिली है। हनीट्रैप-2 के दौरान किन-किन रसूखदार लोगों को निशाना बनाया गया, यह अब भी रहस्य बना हुआ है। श्वेता और रेशू की गिरफ्तारी के बाद अब तक केवल एक ठेकेदार ही हनीट्रैप का शिकार होने की बात सामने आई है। अन्य किसी कथित पीड़ित ने अब तक पुलिस से संपर्क नहीं किया है।

पहले आरती, अब रेशू को बनाया मोहरा
हनीट्रैप मामले की मुख्य आरोपियों में शामिल श्वेता जैन मूल रूप से सागर की रहने वाली है। पहले हनीट्रैप मामले में उसके साथ आरती दयाल थी। आरोप है कि आरती ने इंदौर के इंजीनियर हरभजन सिंह को अपने जाल में फंसाया था। मामले में रुपये वसूलने और नगर निगम के ठेके दिलवाने जैसे आरोप भी सामने आए थे। 

गिरफ्तारी के बाद आरती ने श्वेता से दूरी बना ली। इसके बाद श्वेता को रेशू का साथ मिला। पुलिस ने रेशू के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच की है। बताया जा रहा है कि उसने मस्कट से पढ़ाई की और वहां एक युवक से शादी भी की थी। बाद में विवाद के बाद वह भारत लौट आई। इसके बाद श्वेता और रेशू के बीच नजदीकियां बढ़ीं और रेशू कथित तौर पर गिरोह से जुड़ गई। पुलिस के अनुसार, हनीट्रैप-2 में रेशू की भूमिका ठेकेदारों और रसूखदार लोगों को निशाना बनाने की थी।

क्या था हनीट्रैप-वन?
करीब पांच साल पहले सामने आए हनीट्रैप मामले में श्वेता जैन, आरती दयाल और अन्य युवतियों पर प्रदेश के कई बड़े अफसरों और नेताओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाने के आरोप लगे थे। आरोप था कि इन वीडियो का इस्तेमाल कर लोगों से रुपये वसूलने, ठेके हासिल करने और अन्य काम करवाने का दबाव बनाया जाता था। 

इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत के बाद मामले का खुलासा हुआ था। जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि गिरफ्तारी से पहले गिरोह ने कुछ वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री अलग-अलग जगहों पर रखी थी। बाद में कुछ कथित वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए थे।

क्या है हनीट्रैप-2?
हनीट्रैप-2 में श्वेता और रेशू पर इंदौर, उज्जैन समेत अन्य शहरों के रसूखदार लोगों को निशाना बनाने के आरोप हैं। जांच में यह बात भी सामने आई है कि पहले मामले से सबक लेते हुए इस बार कथित तौर पर बड़े अफसरों से दूरी बनाई गई। आरोप है कि इस बार गिरोह ने खासतौर पर शराब ठेकेदारों और सरकारी ठेके लेने वाले लोगों को निशाना बनाया। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य संभावित लोगों, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और कथित पीड़ितों की जानकारी जुटाने में लगी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments