Thursday, September 3, 2026
Google search engine
Homeराज्यमध्य प्रदेशतीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन...

तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन भौतिकी, रसायन, विष विज्ञान, डीएनए, क्राइम सीन किट एवं बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

भोपाल 

अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक और पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID), पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित 03 दिवसीय विशेष फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी व वैज्ञानिक सत्रों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव के निर्देशन में तथा पुलिस उप महानिरीक्षक  साकेत पाण्डेय,  प्रशांत खरे एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मनीष खत्री के सतत मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है।

कार्यशाला के दूसरे दिन राज्य के क्षेत्रीय एवं राज्य फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों ने अलग-अलग विषयों पर गहन व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।

फॉरेंसिक भौतिकी एवं वॉयस साक्ष्य प्रबंधन

क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (RFSL), भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने फॉरेंसिक भौतिकी और वॉयस में भौतिक साक्ष्य प्रबंधन तथा FSL की भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ध्वनि नमूनों, भौतिक अवशेषों के वैज्ञानिक संकलन, उनके संरक्षण एवं प्रयोगशाला अग्रेषण की मानक कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया।

फॉरेंसिक रसायन एवं विष विज्ञान (Toxicology)

आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. राजीव दुआ ने रासायनिक नमूनों, मादक पदार्थों, विषाक्त पदार्थों के संकलन तथा रखरखाव की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विधिक साक्ष्य के रूप में रासायनिक नमूनों की शुद्धता बनाए रखना विवेचना की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

फॉरेंसिक बायोलॉजी, सीरोलॉजी एवं डीएनए (DNA) साक्ष्य प्रबंधन

आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. कमलेश कैथोलिया ने जैविक साक्ष्यों—जैसे रक्त, वीर्य, बाल, लार व अन्य शारीरिक द्रव्यों के वैज्ञानिक संकलन, पैकेजिंग, चेन ऑफ कस्टडी तथा डीएनए प्रोफाइलिंग में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की भूमिका पर विस्तृत तकनीकी जानकारी दी।

अपराध स्थल अन्वेषण, प्रबंधन एवं क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन किट का उपयोग

सत्र में जिला सीन क्राइम ऑफ मोबाइल यूनिट, भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड ने क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन (CSI) किट के व्यावहारिक उपयोग, घटनास्थल के प्रबंधन, साक्ष्यों की प्राथमिकता आधारित पहचान और सुरक्षित जब्ती प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। उन्होंने घटनास्थल को दूषित होने से बचाने और संकलित साक्ष्यों के सही प्रलेखन के व्यावहारिक गुर सिखाए।

बैलिस्टिक्स शाखा एवं शंका समाधान सत्र

अंतिम सत्र में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL), सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी  रामदा कनेश ने बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। इसमें आग्नेयास्त्रों, प्रयुक्त कारतूसों, गोलियों (बुलेट्स), गनशॉट रेजीड्यू (GSR) के संकलन, संरक्षण तथा एफएसएल परीक्षण की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सत्र के अंत में प्रतिभागियों की व्यावहारिक शंकाओं का भी समाधान किया गया।

कार्यशाला का समापन 03 सितंबर को विशेष पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग  पंकज वास्‍तव की उपस्थित में होगा। अंतिम दिन सीआईडी फोटोग्राफी शाखा के उप पुलिस अधीक्षक (फोटो)  अमिताभ तिवारी द्वारा अपराध घटना स्थल फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुतीकरण और उसके न्यायालयीन प्रमाणीकरण पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments