Wednesday, October 21, 2026
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ट्विशा शर्मा मौत मामले में केस ट्रांसफर, अब उसी कोर्ट में होगी रिटायर्ड जज के मामले की सुनवाई

भोपाल 

 एमपी के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ अब उसी कोर्ट में ट्रायल चलेगा, जहां से पहले गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिली थी. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले को विशेष न्यायाधीश (ओएडब्ल्यू) पल्लवी द्विवेदी के कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है। 

ट्विशा शर्मा मौत केस गिरिबाला को जिस अदालत ने दी थी जमानत, वहीं चलेगा ट्रायल
एडवोकेट अंकुर पांडे के अनुसार, इसी अदालत ने पहले रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी. हालांकि, बाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने जिला अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया और गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत खारिज कर दी.  इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद से ही गिरिबाला सिंह जेल में हैं। 

इस मामले में अब ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, चार्जशीट दाखिल होने के बाद निचली अदालतों को प्राथमिकता के आधार पर 60 से 90 दिनों के भीतर आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास करना है. ऐसे में इस मामले में भी आरोप तय करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। 

17 अगस्त को CBI ने दाखिल किया था चालान
ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल कोर्ट में रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे, ट्विशा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ चालान पेश किया था. चालान में जांच के दौरान सामने आए कई महत्वपूर्ण फैक्ट्स का जिक्र किया गया है. सीबीआई के दस्तावेजों के अनुसार, एम्स दिल्ली में की गई पोस्टमार्टम जांच की रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर गंभीर चोट के निशान नहीं मिले थे. वहीं, एम्स भोपाल की पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा की मौत से पहले उसके शरीर पर चोट के 6 निशान पाए जाने की बात सामने आई थी। 

सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल अदालत में गिरिबाला, उनके बेटे व ट्विशा के पति समर्थ के खिलाफ चालान दाखिल किया था। चार्जशीट के अनुसार, एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर किसी भी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं पाए गए थे। हालांकि, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पूर्व शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज थे।
सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल अदालत में गिरिबाला, उनके बेटे व ट्विशा के पति समर्थ के खिलाफ चालान दाखिल किया था। चार्जशीट के अनुसार, एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर किसी भी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं पाए गए थे। हालांकि, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पूर्व शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज थे।

अब कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान इन दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्टों समेत सीबीआई की ओर से पेश किए गए अन्य सबूतों पर भी विचार किया जाएगा. इस मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। 

एम्स की दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर
सीबीआई की चार्जशीट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर गंभीर चोट के निशान नहीं मिले। वहीं, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज किए गए थे।

पहले भी जमानत को लेकर बदली थीं अदालतें
गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनकी नियमित जमानत अर्जी पर भोपाल जिला अदालत में लगातार तीन दिनों तक सुनवाई नहीं हो सकी थी। बताया गया कि मामला अलग-अलग अदालतों में भेजे जाने के बाद संबंधित न्यायाधीशों ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इसका कारण बताया कि वे पहले गिरिबाला सिंह के अधीनस्थ या उनके सहकर्मी के रूप में काम कर चुके हैं। बाद में मामला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रामप्रताप मिश्रा की अदालत में पहुंचा, जहां उनकी पहली नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। 

परिजनों ने बाहर केस ट्रांसफर करने की मांग की
केस उसी अदालत में ट्रांसफर होने के बाद ट्विशा के परिजनों और उनके वकीलों में नाराजगी बढ़ गई है। परिजनों ने भोपाल में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताते हुए मामले को किसी अन्य स्थान पर ट्रांसफर करने की मांग की है।

हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई टली
गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई नहीं हो सकी। दैनिक कार्यसूची में जमानत आवेदन का नंबर काफी पीछे होने के कारण उपलब्ध समय में मामले की सुनवाई नहीं हो पाई। अब जमानत याचिका पर आने वाले दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।

 

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