Sunday, August 30, 2026
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MP में बारिश का असमान आंकड़ा, कहीं कोटे से ज्यादा तो इंदौर-उज्जैन अभी भी पीछे

भोपाल

मध्य प्रदेश में अगस्त के दौरान मानसून की सक्रियता से बारिश का आंकड़ा लगातार बढ़ा है। प्रदेश में अब तक औसत 30 इंच बारिश होनी थी, जबकि 27.3 इंच पानी गिर चुका है। यह सामान्य बारिश के कोटे से 2.7 इंच कम है। मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में अब तक कोटे की 73 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई है। भिंड, निवाड़ी और सतना समेत 16 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश हुई है।

अगस्त में मेहरबान रहे मानसून की बदौलत मध्य प्रदेश में अब तक कोटे की 73 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। भिंड, निवाड़ी और सतना ऐसे जिले हैं, जहां पर कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल में 93%, इंदौर-उज्जैन में 61%, जबलपुर में 68% और ग्वालियर में 83% पानी गिरा है।

मौसम विभाग के अनुसार, निवाड़ी में सबसे ज्यादा 39.1 इंच पानी गिर चुका है, जो कोटे से 28 प्रतिशत ज्यादा है। डिंडौरी, मंडला में 37 इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है।

बता दें कि अगस्त के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में मानसून ट्रफ, डिप्रेशन और लो प्रेशर एरिया (निम्न दवाब क्षेत्र) एक्टिव रहे। इस वजह से पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का दौर बना रहा। डिंडौरी, सतना, सिवनी समेत कई जिलों में तो बाढ़ आ गई।

नर्मदा, मंदाकिनी नदियां उफान पर रही और झरने फूट पड़े। IMD (मौसम केंद्र) की माने तो सितंबर के पहले सप्ताह से भी तेज बारिश का दौर बना रहेगा। ऐसे में कई और जिलों में कोटा फुल हो सकता है। प्रदेश में अब तक औसत 30 इंच बारिश होना थी, लेकिन 27.3 इंच पानी ही गिरा है। यह कोटे से 2.7 इंच कम है।

एमपी के डैम औसत 90% तक भरे प्रदेश के डैमों की स्थिति के बारे में बात करें तो जल भराव की स्थिति 70 प्रतिशत से ज्यादा है। इनमें इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाण सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वरर, और तवा 50 से 90 प्रतिशत तक भर चुके हैं। बरगी, जौहिला समेत कई डैमों के गेट भी खुल चुके हैं। हालांकि, इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों की स्थिति ठीक नहीं है।

इस बार 9 दिन लेट आया था मानसून बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई।

इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा, लेकिन तीसरे सप्ताह मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच पानी गिर गया। चौथे सप्ताह में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो अब तक जारी है।

एमपी में इन जिलों में कम/ज्यादा बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी, निवाड़ी में 1% से 50% तक कम बारिश हुई है।

वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 51% कम पानी गिरा है।

16 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

निवाड़ी में सबसे ज्यादा बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, निवाड़ी में अब तक सबसे ज्यादा 39.1 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह जिले के सामान्य कोटे से 28 प्रतिशत ज्यादा है। डिंडौरी और मंडला में भी 37 इंच से ज्यादा बारिश हुई है।

अगस्त के आखिरी सप्ताह में मानसून ट्रफ, डिप्रेशन और लो प्रेशर एरिया सक्रिय रहे। इसके चलते प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का दौर बना रहा। डिंडौरी, सतना और सिवनी समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी। नर्मदा और मंदाकिनी नदियां भी उफान पर रहीं।

मौसम विभाग के मुताबिक सितंबर के पहले सप्ताह में भी तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में कई और जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो सकता है।

डैमों में बढ़ा जलस्तर, फसलों को फायदा
बारिश का असर प्रदेश के डैमों पर भी दिखाई दे रहा है। डैमों में जलभराव 70 प्रतिशत से ज्यादा है। इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाण सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वर और तवा जैसे डैम 50 से 90 प्रतिशत तक भर चुके हैं।

बरगी और जौहिला समेत कई डैमों के गेट भी खोले जा चुके हैं। हालांकि, इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों की स्थिति अभी ठीक नहीं है। बारिश से फसलों को भी फायदा मिला है।

9 दिन की देरी से आया था मानसून
इस साल मध्य प्रदेश में मानसून 9 दिन की देरी से 24 जून को पहुंचा था। इसके बाद अगले नौ दिनों में पूरे प्रदेश को मानसून ने कवर कर लिया था। देरी के कारण जून में प्रदेश में 30 प्रतिशत कम बारिश हुई थी।

जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक हो गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा और कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस दौरान औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा।

जुलाई के तीसरे सप्ताह में मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच बारिश हुई। चौथे सप्ताह में भी भारी बारिश दर्ज की गई। अगस्त के दूसरे सप्ताह से भारी बारिश का दौर शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।

पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बारिश की स्थिति
प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ में 1 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।

पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।

16 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
IMD के मुताबिक अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

 

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