Friday, August 28, 2026
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‘हम नहीं बचेंगे, बच्चों का ख्याल रखना…’ नेपाल में फंसे भोपाल के परिवार की आखिरी कॉल, 29 रिश्तेदार लापता

 भोपाल
 नेपाल स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोसाईकुंड की धार्मिक यात्रा पर गए एक ही कुनबे के 29 श्रद्धालुओं के अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) में लापता होने का हृदयविदारक मामला सामने आया है। भोपाल में निवासरत नेपाल मूल के एक परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, लापता हुए 29 लोग आपस में निकट संबंधी हैं। इस समूह में जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी समेत कई करीबी रिश्तेदार शामिल हैं जो पूर्णिमा के पावन अवसर पर दर्शन करने निकले थे।

भोजन छोड़ जान बचाने को पहाड़ की ओर भागे, छत पर ली शरण
भोपाल की रहने वाली देवकी अधिकारी ने बताया कि उनके अपने परिवार के चार सदस्य भी इस लापता समूह का हिस्सा हैं। उन्होंने दर्दनाक आपबीती साझा करते हुए बताया कि यात्रा के दौरान अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली।

    खतरे की आहट पाते ही सभी श्रद्धालु अपना भोजन और सामान वहीं छोड़कर जान बचाने के लिए पहाड़ी इलाके की तरफ भागे।

    सुरक्षित स्थान की तलाश में उन्होंने पहाड़ पर बने एक मकान की छत पर आश्रय लिया।
    श्रद्धालुओं ने फोन पर अपने परिजनों को सूचित किया कि जिस बस से वे आए थे, वह उफनती बाढ़ में बह चुकी है और वे स्वयं जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं।

'घर डूब रहा है, अब हम नहीं बचेंगे'
देवकी अधिकारी ने बताया कि बीते दिन प्रातः लगभग 9:30 बजे परिजनों से अंतिम बार बातचीत हो सकी थी। फोन पर डूबते हुए लोगों ने कहा, "मकान आधा जलमग्न हो चुका है, हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। हमारे पीछे हमारे मासूम बच्चों का ध्यान रखना।"

बातचीत के दौरान ही दूसरी तरफ से आवाज आनी बंद हो गई, हालांकि कॉल तुरंत डिस्कनेक्ट नहीं हुआ था। उस समय के बाद से ही सभी 29 सदस्यों से संपर्क पूरी तरह से कटा हुआ है। न तो यात्रियों का कोई सुराग मिला है, न ही उनकी बस का पता चला है और न ही कोई पार्थिव शरीर बरामद हुआ है।

त्रिशूली नदी का पुल टूटने से राहत एवं बचाव कार्य बाधित
घटनास्थल तक पहुंचने के मार्गों का ठप हो जाना परिजनों और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। त्रिशूली नदी पर निर्मित मुख्य पुल बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जिस स्थान पर सामान्य परिस्थितियों में आधे घंटे में पहुंचा जा सकता था, वहां अब ऊबड़-खाबड़ ग्रामीण और पहाड़ी रास्तों से पहुंचने में 6 से 8 घंटे का समय लग रहा है।

मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर गहराया संकट
लापता श्रद्धालुओं के पीछे छूटे छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर भोपाल में रह रहे परिजन गहरे सदमे और चिंता में हैं। देवकी अधिकारी ने भारत और नेपाल सरकार से तत्काल व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने और खोजबीन तेज करने की भावुक अपील की है। परिजनों की मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द स्वजनों की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी दी जाए ताकि बच्चों और परिवार को संभाला जा सके।

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