Monday, August 24, 2026
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विदिशा के विभोर ने अंतरिक्ष में रचा कमाल, बनाया नेविगेशन सैटेलाइट; PM मोदी भी हुए मुरीद

 विदिशा
 मध्य प्रदेश के विदिशा निवासी युवा इंजीनियर और उद्यमी विभोर जैन अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने के करीब हैं। उनकी कंपनी व्योमिक निम्न पृथ्वी कक्षा आधारित स्थिति निर्धारण, मार्गदर्शन और समय निर्धारण प्रणाली के लिए उपग्रह प्रणाली विकसित कर रही है। वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही में पहला सैटेलाइट लांच करने की तैयारी है।

 विभोर ने प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ में नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के सामने प्रस्तुतीकरण दिया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान विभोर सहित 20 स्पेस स्टार्टअप सीईओ व संस्थापकों से मुलाकात की।

विभोर के मुताबिक उनकी कंपनी का लक्ष्य ऐसा वैश्विक उपग्रह समूह विकसित करना है जो रक्षा, दूरसंचार, ड्रोन, स्वचालित प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए सटीक व सुरक्षित स्थिति निर्धारण, मार्गदर्शन और समय निर्धारण सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम हो। आज इस तकनीक का उपयोग मोबाइल से लेकर वाहन, ड्रोन और विमान तक में होता है।

विभोर की टीम उपग्रह की सटीक कक्षा निर्धारण प्रणाली, उपग्रहों के बीच संपर्क व्यवस्था और परमाणु घड़ी समूह जैसी तकनीकों पर काम कर रही है। जो पृथ्वी के करीब रहने वाले उपग्रहों से मजबूत संकेत और सटीक स्थिति उपलब्ध कराने में सक्षम होगी।

ड्रोन समूह पर काम करते समय आया विचार
विभोर के मुताबिक सैटेलाइट आधारित मार्गदर्शन तकनीक तक पहुंचने की कहानी ड्रोन से शुरू हुई। आइआइटी के बाद उन्होंने लोकेश कबदाल और अनुराग पाटिल के साथ ड्रोन समूह तकनीक पर काम शुरू किया। टीम ने करीब 55 से 60 ड्रोन विकसित किए।

इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि बड़ी संख्या में ड्रोन को स्व संचालित करने के लिए केवल बेहतर हार्डवेयर पर्याप्त नहीं है। इनकी स्थिति और समय की सटीक जानकारी भी जरूरी है। इसके बाद व्योम आइसी की शुरुआत हुई।

कारगिल के अनुभव से स्वदेशी नेविगेशन तक
विभोर बताते हैं कि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान सैन्य अभियानों के लिए उपग्रह आधारित मार्गदर्शन की जरूरत थी, लेकिन अमेरिका ने आधुनिक जीपीएस सुविधा देने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद भारत ने अपनी सैटेलाइट आधारित मार्गदर्शन क्षमता विकसित की और आगे चलकर नाविक अस्तित्व में आया। अब ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें अलग-अलग कक्षाओं और तकनीकों की प्रणालियां एक-दूसरे को मजबूत कर सकें।

 

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