Thursday, August 20, 2026
Google search engine
Homeदेशभागवत के अमेरिका दौरे पर अमेरिकी आयोग का विरोध, धार्मिक स्वतंत्रता को...

भागवत के अमेरिका दौरे पर अमेरिकी आयोग का विरोध, धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर उठाए सवाल; अब बढ़ा विवाद

नईदिल्ली 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल भागवत इस महीने के अंत में अमेरिका जाने वाले हैं। इससे पहले 'अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिकी आयोग' (USCIRF) ने उनके इस दौरे का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। आयोग के सदस्यों ने अमेरिकी सरकार से मांग की है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाले इस संघ के सदस्यों पर उन पर प्रतिबंध लगाए।

बता दें कि USCIRF अमेरिकी लेजिस्लेटिव ब्रांच की एक एजेंसी है। इसे 1998 में बनाया गया था। इस एजेंसी के सदस्यों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और शीर्ष सांसद करते हैं। हालांकि, यह संस्था अमेरिकी सरकार से स्वतंत्र रूप से काम करने का दावा करती है।

USCIRF ने बयान में क्या कहा?
USCIRF के चीफ आसिफ महमूद ने एक बयान जारी कर अमेरिकी प्रशासन से संघ के खिलाफ कदम उठाने की मांग की। वहीं आयोग के एक अन्य सदस्य जीन मिल्स ने कहा है कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, उच्च स्तरीय बैठकों या राजनयिक शिष्टाचार से सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए। USCIRF ने कहा कि अमेरिकी सरकार को आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान करना चाहिए।jag

अल्पसंख्यकों पर हमले का आरोप
आयोग के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने अपने बयान में गंभीर आरोप लगाए। महमूद ने कहा, “भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं। यह भारत का एक बड़ा संगठन है और जिसके कुछ संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, ईसाई और मुस्लिम पर हमले करने के आरोप हैं। अब RSS प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका की यात्रा की योजना बना रहे हैं।”

पहले भी विवादित सिफारिशें कर चुका है आयोग
यह पहली बार नहीं है जब USCIRF ने भारत विरोधी रुख अपनाया है। इससे पहले भी इस एजेंसी ने अमेरिकी सरकार से विवादित सिफारिशें की थीं। तब आयोग ने भारत की कुछ खुफिया एजेंसियों और संघ के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। आयोग ने भारत को "विशेष चिंता वाले देश" का दर्जा देने का भी सुझाव दिया था।

विदेश मंत्रालय दे चुका है करारा जवाब
भारत सरकार ने कई बार आयोग की इस तरह की रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज किया है। इससे पहले आयोग की ओर से उठे प्रतिबंध की मांग पर विदेश मंत्रालय ने करारा जवाब दिया था। आयोग पर निशाना साधते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत 1.4 अरब लोगों का देश है, जहां दुनिया के सभी धर्मों के लोग शांति और सद्भावना के साथ रहते हैं।

विदेश मंत्रालय ने आयोग के रुख को एक "खास एजेंडा" और भारत के बहुसांस्कृतिक समाज को बदनाम करने की कोशिश करार दिया था। भारत ने स्पष्ट कहा था कि लोकतंत्र और सहिष्णुता के प्रतीक के रूप में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की ऐसी कोशिश कभी सफल नहीं होगी। भारत ने कहा था, “दरअसल USCIRF को ही चिंता वाला संगठन घोषित कर दिया जाना चाहिए।”

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments