Wednesday, August 19, 2026
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पहले इसकी जल भंडारण क्षमता 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट थी, जिसे बढ़ाकर 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट किया गया

लखनऊ
योगी सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को विश्व पटल पर पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इस दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। झांसी के 140 साल पुराना पारीछा बांध अब वैश्विक विरासत का हिस्सा बन गया है। इसे इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (आईसीआईडी) ने वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर्स (डब्ल्यूएचआईएस) के रूप में मान्यता दे दी है। वहीं पारीक्षा बांध को फ्रांस में अक्टूबर में होने वाली 26वीं आईसीआईडी इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउसिंल मीटिंग के दौरान डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 दिया जाएगा।

14 अक्टूबर को फ्रांस के मार्सेई में आयोजित कार्यक्रम में दिया जाएगा अवार्ड
प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि 13 अगस्त को विभाग को आईसीआईडी की ओर से एक पत्र भेजा गया था, जिसमें झांसी के 140 साल पुराने पारीछा बांध को फ्रांस के मार्सेई में 14 अक्टूबर में होने वाली 26वीं आईसीआईडी इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउसिंल मीटिंग के दौरान डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 दिया जाएगा। इसके लिए विभाग के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है।

पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है पारीछा बांध
झांसी का पारीछा बांध बेतवा नदी पर बना है। यह करीब 140 साल से बुंदेलखंड की सिंचाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बेतवा नहर प्रणाली का मुख्य हिस्सा है। इस नहर व्यवस्था से बुंदेलखंड के सूखे क्षेत्रों में खेती के लिए पानी पहुंचाया जाता है। पारीछा बांध करीब 1,174 मीटर लंबा है और इसकी ऊंचाई नदी तल से करीब 16.8 मीटर है। इसमें 318 स्टील के गेट लगाए गए हैं। इन गेटों की मदद से पानी को रोकने और जरूरत के हिसाब से छोड़ने का काम किया जाता है। वहीं पिछले कुछ वर्षों में इसकी पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाई गई है। पहले इसकी क्षमता करीब 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट थी, जिसे बढ़ाकर करीब 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट किया गया। यह बांध 140 साल पुराना होने के बाद भी काम कर रहा है। इस बांध से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में सिंचाई का फायदा मिलता है। बारिश के मौसम में जब बांध के गेट खोले जाते हैं तो यहां पानी का सुंदर दृश्य भी दिखाई देता है। यही वजह है कि यह जगह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनती है। पारीछा बांध से थर्मल पावर प्रोजेक्ट को भी पानी मिलता है। इस परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता 920 मेगावाट है।

योगी सरकार पुरानी जल सरंचनाओं को सम्मान देने के साथ आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को कर रही मजबूत
पारीछा बांध को विकसित करने की योजना 19वीं सदी में बनाई गई थी। वर्ष 1855 में कैप्टन स्ट्रेची ने बुंदेलखंड के लिए नहर प्रणाली विकसित करने का विचार रखा था। इसके बाद सर्वे किया गया। वर्ष 1881 में इसका निर्माण शुरू हुआ और वर्ष 1886 में बांध चालू हो गया। पारीछा बांध को डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 अवॉर्ड के लिए चुना जाना सिर्फ एक पुराने बांध को सम्मान मिलना नहीं है। यह बुंदेलखंड की उस सिंचाई व्यवस्था की पहचान है, जो लंबे समय से किसानों और खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने में काम कर रही है। योगी सरकार प्रदेश में पुरानी जल संरचनाओं को सम्मान देने के साथ-साथ आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने पर भी कार्य कर रही है। यह उसी का नतीजा है कि पारीक्षा बांध को वैश्विक विरासत में मान्यता दी गयी है।

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