Tuesday, August 18, 2026
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सीमावर्ती क्षेत्रों को मिलेगा उझ दरिया का पानी, पंजाब में बांध निर्माण की योजना पर जोर

चंडीगढ़.

आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने अपने विधानसभा हलके के पंचों, सरपंचों, चेयरमैनों और अन्य लोगों को साथ लेकर पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की।
उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए उझ दरिया पर बांध बनाने की मांग राज्यपाल के सामने रखी।

धालीवाल ने कहा कि हर साल बाढ़ के कारण किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं, सड़कें और स्कूल क्षतिग्रस्त होते हैं तथा लोगों की जमीन पानी की चपेट में आ जाती है। धालीवाल ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जम्मू-कश्मीर की तरफ से उझ दरिया में अचानक पानी आने के कारण फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा होती है। भारी बारिश या बादल फटने जैसी स्थिति में पानी तेजी से नीचे आता है और इसका असर पठानकोट, सुजानपुर, दीनानगर, डेरा बाबा नानक और गुरदासपुर सहित आसपास के इलाकों तक पहुंचता है। उझ नदी आगे जाकर रावी में मिलती है। हाल में भी धालीवाल ने उझ नदी के बैराज का दौरा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उझ दरिया पर रणजीत सागर बांध की तर्ज पर बांध बनाने की मांग की थी।

10-12 साल से प्रस्ताव पर नहीं हुआ स्थायी समाधान
धालीवाल ने राज्यपाल को बताया कि उझ दरिया पर बांध बनाने का प्रस्ताव पिछले करीब 10-12 वर्षों से चल रहा है, लेकिन इस दिशा में अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले को उठाएं और प्रधानमंत्री तथा जल शक्ति मंत्रालय से बात कर बांध के निर्माण को आगे बढ़ाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बांध बनने से हर साल आने वाली बाढ़ को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके साथ ही पानी का इस्तेमाल सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है। इससे किसानों और सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को लंबे समय तक राहत मिल सकती है।

'विकसित भारत में सीमावर्ती लोग कब शामिल होंगे'
धालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि देश को विकसित बनाने की बात हो रही है, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले वे लोग कब विकसित होंगे जिनकी जमीन और फसलें हर साल बाढ़ की चपेट में आ जाती हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोग खेती करते हैं, फसल पैदा करते हैं और दूध का उत्पादन करते हैं। ऐसे में उन्हें भी विकसित भारत का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ आने से लोगों की जमीन और फसलें प्रभावित होती हैं, इसलिए इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।

बाढ़ के मुआवजे का भी उठाया मुद्दा
धालीवाल ने पिछली बाढ़ के दौरान घोषित मुआवजे का मुद्दा भी राज्यपाल के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली बार बाढ़ से हुए नुकसान के लिए केंद्र की ओर से मुआवजे की घोषणा की गई थी, लेकिन उनके अनुसार प्रभावित लोगों को अब तक पूरी राशि नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि यदि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग हर साल बाढ़ की मार झेलते रहेंगे और उन्हें समय पर मुआवजा नहीं मिलेगा तो उनके विकास की चिंता कौन करेगा। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि केंद्र सरकार के स्तर पर इस मामले को भी उठाया जाए।

राज्यपाल का सकारात्मक जवाब, जल शक्ति मंत्री से होगी बैठक
धालीवाल ने कहा कि राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की ओर से उनकी मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने बताया कि जल्द ही राज्यपाल को साथ लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ बैठक की जाएगी। इस बैठक में उझ दरिया पर बांध बनाने और सीमावर्ती क्षेत्र को हर साल आने वाली बाढ़ से बचाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। धालीवाल ने कहा कि उझ दरिया पर बांध बनना केवल बाढ़ नियंत्रण का मामला नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों और आम लोगों के भविष्य से जुड़ा विषय है। बांध बनने से बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने के साथ पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा और क्षेत्र के लोगों को स्थायी राहत मिल सकेगी।

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