Wednesday, August 12, 2026
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‘न रकम बता पाए, न संतोषजनक जवाब दे पाए’, जस्टिस वर्मा मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया?

नई दिल्ली

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर मिले कैश की जांच करने वाली कमेटी की रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश हो गई. कमेटी ने जस्टिस वर्मा के ऊपर लगे तीनों आरोपों को सही माना है. कमेटी ने यह बात भी मानी है कि घर पर जो कैश मिले थे, उसे लेकर जस्टिस वर्मा के जवाब संतोषजनक नहीं थे। 

जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर पिछले साल 14 मार्च की रात को भारी मात्रा में कैश मिला था. उस समय जस्टिस वर्मा घर पर नहीं थे और उनके घर पर आग लग गई थी. आग बुझाने आई फायर ब्रिगेड की टीम को उनके घर से 500-500 रुपये के नोटों से भरे बोरे मिले थे. इसके बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया गया था। 

जस्टिस वर्मा के घर पर मिले कैश की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी. 200 से ज्यादा सांसदों ने भी जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए महाभियोग लाने की मांग की थी. इसी बीच अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन उनका इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। 

जस्टिस वर्मा पर तीनों आरोप साबित

बुधवार को लोकसभा में पेश हुई जांच कमेटी की रिपोर्ट ने जस्टिस वर्मा के ऊपर लगे तीनों आरोपों को सही माना है। 

    पहला आरोप: राजधानी दिल्ली के 30, तुगलक क्रेसेंट के आधिकारिक आवास के स्टोररूम से 500 रुपये के नोटों के बंडल बरामद बरामद हुए थे. कमेटी के मुताबिक, जस्टिस वर्मा नकदी की मौजूदगी, स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक सफाई नहीं दे सके. कमेटी ने इस आरोप को सही माना। 

    दूसरा आरोप: कमेटी ने पाया कि मामले से जुड़े सबूतों को उचित तरीके से सुरक्षित और संरक्षित नहीं रखा गया.  कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए जाने की बात सामने आई है. बाद में कुछ करेंसी नोटों के गायब या अनुपलब्ध होने का भी स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिला. कमेटी ने इसे सबूतों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही और विफलता माना. हालांकि, इससे ये साबित नहीं होता की जज ने खुद से नोट को हटाया। 

    तीसरा आरोप: कमेटी ने जज की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण, खासकर 22 मार्च 2025 के जवाब, को संतोषजनक नहीं माना. कमेटी के अनुसार, उनका रुख टालमटोल वाला रहा और वह संस्थागत जिम्मेदारी और अपेक्षित स्पष्टता के अनुरूप नहीं था. स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह आरोप भी सिद्ध पाया गया। 

अब आगे क्या?

जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट के साथ कार्यवाही का रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज और सबूत सौंप दिए हैं. अब रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

14 मार्च 2025 की रात क्या हुआ था?
पिछले साल 14 मार्च की रात को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लग गई थी. उस वक्त जस्टिस वर्मा घर पर नहीं थे. फायर ब्रिगेड की टीम जब आग बुझाने आई तो उसे स्टोररूम में जले हुए नोट मिले. 500-500 रुपये के ये नोट बोरे में भरे हुए थे। 

घर से कैश बरामद होने के बाद जस्टिस वर्मा ने दावा किया था कि जो कैश मिला है, वह उनका नहीं है. 

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जांच कमेटी बनाई थी. कमेटी ने भी इस बात को माना था कि उनके घर से अधजले नोट मिले थे. सुप्रीम कोर्ट ने भी अधजले नोटों का वीडियो जारी किया था। 

बाद में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया था. जुलाई 2025 में 200 सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग लाने की मांग की थी. इसके बाद अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया. हालांकि, अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। 

कौन हैं जस्टिस वर्मा?
जस्टिस वर्मा का 6 जनवरी 1969 को इलाहाबाद में हुआ था. दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम की डिग्री लेने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश की रीवा यूनिवर्सिटी से LLB की डिग्री हासिल की. 1992 में जस्टिस वर्मा वकील बने. अक्टूबर 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया. फिर 1 फरवरी 2016 को जस्टिस वर्मा इलाहाबाद हाई कोर्ट के परमानेंट जज बने. 11 अक्टूबर 2021 को उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था. 28 मार्च 2025 को उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया गया था। 

 

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