Monday, August 10, 2026
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बच्चों के कान-नाक छिदवाने की सही उम्र क्या? डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां

भारत में बच्चों के कान और कई परिवारों में नाक छिदवाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. कुछ लोग जन्म के कुछ महीनों बाद ही बच्चे का कान छिदवा देते हैं, जबकि कुछ बड़े होने का इंतजार करते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर बच्चों के कान या नाक छिदवाने की सही उम्र क्या है? इस बारे में डॉ. आर. के. चतुर्वेदी (Physician) ने कुछ जरूरी बातें बताईं.

बच्चे के थोड़ा समझदार होने का इंतजार करें
डॉ. आर. के. चतुर्वेदी के अनुसार, बहुत छोटे बच्चे का कान या नाक छिदवाने से बचना चाहिए. बेहतर होगा कि बच्चे का पियर्सिंग तभी कराया जाए, जब वह थोड़ा समझदार हो और नियमित रूप से ईयररिंग या नोज पिन पहन सके. बहुत छोटे बच्चे अक्सर कान की बाली पकड़कर खींच लेते हैं, जिससे खून निकल सकता है और घाव भी हो सकता है.

बहुत छोटी उम्र में पियर्सिंग क्यों नहीं करानी चाहिए?
डॉक्टर बताते हैं कि छोटे बच्चों में पियर्सिंग के दौरान अगर गलती से नस (नर्व) को नुकसान पहुंच जाए, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है. इसके अलावा, पियर्सिंग के समय होने वाला तेज दर्द बच्चे के मन में डर बैठा सकता है. छोटे बच्चों में डर जल्दी विकसित होता है और कई बार यही डर आगे चलकर ट्रॉमा का रूप भी ले सकता है.

बरसात के मौसम में क्यों नहीं करानी चाहिए पियर्सिंग?
डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, मानसून के दौरान कान या नाक छिदवाने से बचना चाहिए. इस मौसम में नमी अधिक रहती है, जिससे फंगल इंफेक्शन और घाव में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अगर संभव हो तो बारिश का मौसम निकलने के बाद ही पियर्सिंग कराना बेहतर माना जाता है.

पियर्सिंग कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पियर्सिंग करवाने से पहले यह जरूर जांच लें कि जिस सुई या उपकरण का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह नया और स्टरलाइज्ड हो. अगर गन या कोई अन्य उपकरण इस्तेमाल हो रहा है, तो उसकी साफ-सफाई और गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए. खराब क्वालिटी के उपकरण या इस्तेमाल किए हुए सामान से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

क्या है डॉक्टर की सलाह?
डॉ. आर. के. चतुर्वेदी का कहना है कि बच्चों के कान या नाक छिदवाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए, चीजों को समझने लगे और खुद ज्वेलरी पहनने में सक्षम हो, तब पियर्सिंग कराना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है. साथ ही, साफ-सफाई और सही उपकरण का इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है.

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