Thursday, September 10, 2026
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सोनीपत: फैक्ट्रियों को लगाना होगा मॉनिटरिंग सिस्टम, पानी के ट्रीटमेंट पर रहेगी 24×7 नजर

सोनीपत.

ड्रेन के जरिए यमुना नदी में जा रहे दूषित पानी को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने उन फैक्ट्रियों की पहचान की हैं, जो अपने शोधित न किए गए (अनट्रीटेड) दूषित पानी को सीधे ड्रेन में बहा रही हैं। इस क्रम में जिले की ऐसी 422 फैक्ट्रियों को चिह्नित है, जिनमें अब चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए निगरानी यंत्र (माॅनिटरिंग डिवाइस) अनिवार्य कर दिए गए हैं।

प्रदूषित पानी ड्रेन में न गिरे
यमुना में लगातार गिर रहे दूषित पानी के कारण नदी का जल स्तर और उसकी शुद्धता प्रभावित हो रही है। यमुना में जा रहे दूषित पानी को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कमर कस ली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सूरत में फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी बिना शोधित (ट्रीट) किए ड्रेन में नहीं गिरना चाहिए। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने संयंत्रों पर ऑनलाइन रियल टाइम माॅनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

निगरानी यंत्र लगाएंगी फैक्ट्रियां
बोर्ड की इस कार्रवाई से उन उद्योगपतियों में हड़कंप है जो अब तक नियमों को ताक पर रखकर दूषित पानी को बिना शोधित किए पास कर रहे थे। यह दूषित पानी ड्रेन छह के माध्यम से ड्रेन आठ में मिलकर सीधे यमुना में गिर रहा था। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये फैक्ट्रियां समय सीमा के भीतर यंत्र लगाती हैं या नहीं। बोर्ड के अधिकारियों ने कहा है कि जो फैक्ट्रियां निगरानी यंत्र नहीं लगाएंगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या होगा माॅनिटरिंग सिस्टम का काम?
इन निगरानी यंत्रों के जरिए फैक्ट्री से निकलने वाले पानी के मानकों की जानकारी सीधे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर पर उपलब्ध रहेंगी। यदि कोई फैक्ट्री मानक से अधिक प्रदूषित पानी छोड़ती हैं तो इसका तत्काल पता चल जाएगा। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक मानवीय हस्तक्षेप को खत्म करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।

गठित की जाएंगी विशेष निगरानी टीम
सिर्फ मशीनों के भरोसे न रहकर, बोर्ड अब धरातल पर भी अपनी पकड़ मजबूत करेगा। इसके लिए अलग से विशेष टीमों का गठन किया जा रहा है। ये टीमें औचक निरीक्षण करेंगी और यह जांचेंगी कि क्या फैक्ट्री संचालक वास्तव में मानकों का पालन कर रहे हैं या फिर मानिटरिंग सिस्टम के साथ कोई छेड़छाड़ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन नहीं बनाया गया, तो इसके परिणाम घातक होंगे।

दूषित पानी बर्दाश्त नहीं
"दूषित पानी को बिना शोधित किए बाईपास करना अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिले में 422 फैक्ट्रियां चिह्नित की गई हैं, जिनमें निगरानी यंत्र लगवाने के निर्देश दिए हैं। जो फैक्ट्री संचालक नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
– अजय मलिक, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सोनीपत।

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