पानीपत.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) की बैठक में पानीपत-2041 प्रारूप विकास योजना (ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान-2041) पर विचार-विमर्श किया।
बैठक में शहर के भविष्य के विकास, जनसंख्या वृद्धि, शहरी विस्तार, सड़क नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्रों, हरित पट्टियों और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास योजनाएं केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रहें, आने वाले दशकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं। यह जानकारी उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2041 को ध्यान में रखकर तैयार की यह योजना पानीपत को आधुनिक, सुव्यवस्थित और संतुलित शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी। योजना में भविष्य की संभावित जनसंख्या का आकलन करते हुए आवासीय, औद्योगिक, व्यावसायिक तथा सार्वजनिक उपयोग की भूमि का वैज्ञानिक ढंग से नियोजन किया है।
सड़क नेटवर्क, जलापूर्ति और ठोस कचरा प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा
उपायुक्त ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों की व्यवहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जहां जरूरत महसूस हुई, वहां सड़क मार्गों का पुनर्संरेखण (री-अलाइनमेंट) किया गया है। बाहरी परिधि मार्ग (आउटर पेरिफेरी रोड) को भी वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया गया है। नगर निगम की आवश्यकताओं को देखते हुए सेक्टर-53 में जलापूर्ति के लिए बूस्टिंग स्टेशन तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सालिड वेस्ट मैनेजमेंट) स्थल को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र, बेहतर यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
अवैध निर्माण, खनन और प्रदूषण पर नजर रखने के लिए तैयार हो रहा डाटाबेस
हरियाणा सरकार ने सुशासन को तकनीक से जोड़ते हुए ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित निगरानी प्रणाली को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने ‘दृश्या’ (ड्रोन इमेजिंग एंड इन्फार्मेशन सर्विसेज आफ हरियाणा) की बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की। एआइ आधारित चेंज डिटेक्शन एप्लीकेशन से अवैध निर्माण और अतिक्रमण की स्वतः पहचान की जा सकेगी। फरीदाबाद, हिसार, करनाल, पानीपत और यमुनानगर में लगभग 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल मानचित्रण किया जा चुका है। इससे राज्य का बड़ा भू-स्थानिक डाटाबेस तैयार हो रहा है, जो शहरी नियोजन और निगरानी में उपयोगी होगा। इन तकनीकी पहलों से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण, बेहतर शहरी प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।




