Monday, August 3, 2026
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पशुपालकों की बढ़ेगी आय, बकरी दूध और मटन को मिलेगा GI दर्जा

 पटना
 बिहार सरकार राज्य के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

अब चंपारण मटन और बकरी के दूध की ब्रांडिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा। CM सम्राट चौधरी की घोषणा के बाद इन दोनों उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिलाने की पहल शुरू कर दी गई है।

सरकार का मानना है कि जीआई टैग मिलने से स्थानीय पशुपालकों की आय बढ़ेगी, उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा और बिहार की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।

इसके लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।

चंपारण मटन और बकरी के दूध पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन
ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार की पहल पर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग चंपारण क्षेत्र में तैयार होने वाले मटन की गुणवत्ता, स्वाद और स्थानीय नस्लों की विशेषताओं का वैज्ञानिक अध्ययन कराएगा।

यदि यह उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है, तो इसके लिए जीआई टैग का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसी प्रकार, राज्य में उत्पादित बकरी के दूध की पौष्टिकता और औषधीय गुणों को ध्यान में रखते हुए उसकी अलग ब्रांडिंग विकसित की जाएगी।

साथ ही, सुधा के बूथों पर बकरी का दूध और उससे बने अन्य उत्पाद उपलब्ध कराने की भी योजना है।

पैकेजिंग से ई-कॉमर्स तक होगी तैयारी
सरकार की रणनीति केवल जीआई टैग प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग पैकेजिंग, गुणवत्ता मानक, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग और विपणन व्यवस्था को भी मजबूत करेगा, ताकि इन उत्पादों को बड़े शहरों के साथ-साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचाया जा सके।

इस अभियान से जीविका दीदियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और पशुपालक समितियों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि ग्रामीण स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार और आय के अवसर सृजित हो सकें।

पशुपालकों की आय बढ़ाने पर फोकस
सरकार का मानना है कि चंपारण मटन और बकरी के दूध की ब्रांडिंग सफल होने पर राज्य के हजारों पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा।

इससे पशुपालन केवल पारंपरिक आजीविका न रहकर लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सरकार पहले भी बिहार के कई पारंपरिक उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने में सफल रही है। अब चंपारण मटन और बकरी के दूध को भी इस सूची में शामिल करने की तैयारी है

यदि इन उत्पादों को जीआई टैग मिलता है तो बाजार में उनकी अलग पहचान बनेगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और पशुपालकों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

बकरी के दूध का होगा संग्रह और प्रोसेसिंग
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) की ओर से बकरी के दूध का संग्रह, प्रोसेसिंग और विपणन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बकरी पालकों की आय बढ़ाना और उन्हें संगठित बाजार उपलब्ध कराना है।

इसके लिए गोट फेडरेशन के गठन की तैयारी भी की जा रही है। प्रस्ताव को जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। योजना के अनुसार प्रखंड, प्रमंडल और राज्य स्तर पर गोट फेडरेशन का गठन होगा।
पहले चरण में 200 मिलीलीटर और 500 मिलीलीटर की पैकिंग में बकरी का दूध बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा बकरी के दूध से तैयार अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद भी उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

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