Sunday, August 2, 2026
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क्या आकाश आनंद की होगी री-एंट्री? Gen Z ट्रेंड के बीच मायावती के अगले सियासी दांव पर बढ़ी चर्चा

लखनऊ 

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात बिछाई जाने लगी है. बीजेपी और सपा के बीच सिमटते माहौल के बीच बसपा प्रमुख मायावती अपने ट्रंप कार्ड खेलने जा रही हैं. सूबे के सियासी समीकरणों को साधने और अपने मुख्य वोटर बेस को दोबारा एकजुट करने के लिए मायावती अपने भतीजे व बसपा बीएसपी के राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर आकाश आनंद पर फिर से भरोसा जताया है. लगभग सवा दो साल की राजनीतिक खामोशी के बाद आकाश आनंद अब सियासी हुंकार भरने जा रहे हैं। 

2024 के लोकसभा चुनाव में आकाश आनंद ने अपनी शानदार भाषण शैली से देशभर का ध्यान खींच लिया था. बीएसपी समर्थकों में एक गजब का उत्साह दिखने लगा था. आकाश आनंद आक्रामक अंदाज में बीजेपी, सपा और कांग्रेस तीनों पर हमलावर थे. इस दौरान 28 अप्रैल 2024 को आकाश आनंद ने सीतापुर की जनसभा में सीधे-सीधे योगी आदित्यनाथ की सरकार और बीजेपी को निशाने पर लिया, जिसके बाद मायावती ने उन्हें कुछ समय के लिए पार्टी से निकाल दिया था। 

पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश में सपा, कांग्रेस और चंद्रशेखर आजाद युवा वोटरों तक अपनी पहुंच बढ़ा रही हैं. ऐसे में मायावती अपने 31 साल युवा नेता आकाश आनंद को यूपी में उतरकर फस्टटाइमर वोटर्स के बीच अपनी पैठ जमाना चाहती हैं. मायावती के आदेश पर आकाश आनंद 10 अगस्त को हाथरस से मिशन-2027 का आगाज करेंगे? 

हाथरस के आकाश आनंद भरेंगे चुनावी हुंकार
मायावती के भतीजे आकाश आनंद सवा दो साल के बाद यूपी के सियासी रण में उतरने जा रहे हैं. 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद सीट पर बसपा के प्रभारी अविन शर्मा की होने वाली घोषणा के लिए रखी जनसभा को आकाश आनंद संबोधित करेंगे. इस तरह बसपा के चुनाव अभियान की वो औपचारिक शुरुआत करेंगे। 

28 अप्रैल 2024 को सीतापुर में आकाश आनंद की आखिरी जनसभा हुई थी. इस रैली में उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा था,  'जो सरकार अपनी जनता को डराती है, युवाओं को बेरोजगार रखती है और पेपर लीक करवाती है, वह 'आतंकवादी सरकार' जैसी है.' आकाश यहीं नहीं रुके, मंच से लोगों से कहा था कि ऐसी सरकार और उसके प्रतिनिधियों को 'जूते मारकर' सत्ता से बाहर कर देना चाहिए। आकाश आनंद के इसी बयान के बाद ही मायावती ने उन पर एक्शन लिया था. आकाश की तमाम प्रस्तावित रैलियां रद्द कर दी गई थी और यूपी में उनकी कोई भी रैली नहीं हुई थी. बसपा में दोबारा एंट्री करने के बाद आकाश आनंद सिर्फ पार्टी की बैठकों तक सीमित रहा करते थे. 9 अक्टूबर, 2025 को बसपा संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर मायावती के साथ लखनऊ में आकाश ने जनसभा को संबोधित किया था। 

उत्तर प्रदेश में आकाश आनंद की दूसरी पारी
उत्तर प्रदेश में आकाश आनंद की वापसी को सूबे की राजनीति में उनकी दूसरी पारी के तौर पर देखा जा रहा है. 2027 के विधानसभा चुनाव की तपिश बढ़ने के साथ यूपी में फिर से जनसभा शुरू कर रहे हैं. हाथरस के सहाबाज बाद आकाश आनंद ग्रेटर नोएडा के जेवर में 25 अगस्त को अपनी दूसरी रैली  करेंगे. जेवर में भी बीएसपी के उम्मीदवार का ऐलान करेंगे। 

जेवर सीट पर सतवीर नागर को प्रभारी बनाए जाने का प्लान है, जो बाद में पार्टी के प्रत्याशी होंगे. बसपा ने इन बैठकों की तैयारियों की देखरेख की जिम्मेदारी पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली को सौंपी है. बसपा सूत्रों की मुताबिक पार्टी के जिन नेताओं को प्रभारी बनाया जा रहा, उनकी मांग है कि आकाश आनंद आकर उनके नाम का ऐलान करें. हाथरस और जेवर के बाद अलग-अलग इलाके में जाकर जनसभा करेंगे और फिर से बसपा को मजबूत करने की कवायद करते नजर आएंगे। 

2027 का चुनाव बसपा के लिए करो या मरो
बसपा के लिए 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव करो या मरो की हालत में है. 2012 से बसपा उत्तर प्रदेश की सत्ता दूर है और 2027 का चुनाव मायावती के लिए काफी अहम माना जा रहा है. 2027 का चुनाव बसपा के सियासी वजूद को बचाए रखने का है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी के केवल एक विधायक जीते तो 2024 लोकसभा चुनाव में खाता तक नहीं खुला. ऐसे में बसपा पर सवाल सिर्फ सत्ता से दूर होने का ही नहीं, बल्कि अस्तित्व का भी खड़ा हो गया है। 

यूपी की सियासत में बसपा चुनाव दर चुनाव कमजोर होती जा रही है, जिसके चलते पार्टी के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. पिछले कुछ वर्षों में पार्टी का वोट शेयर कम हुआ है, और कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है. मायावती की जाटव समाज पर पकड़ अभी भी बरकरार है, लेकिन गैर-जाटव दलित भी उनसे छिटके हैं. बसपा का वोटर शेयर कम होकर 2022 में 12 फीसदी और 2024 में 9 फीसदी के करीब पहुंच गया है। 

नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद एक नई चुनती बनकर खड़े हुए हैं, जो दलित युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं. राहुल गांधी और अखिलेश यादव की सियासी केमिस्ट्री युवाओं को साधने में जुटी है. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में बसपा के सामने अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. ऐसे में मायावती बसपा को राजनीतिक रूप से उभारने के लिए आकाश आनंद पर फिर से भरोसा जताया है।  

बसपा के लिए सियासी संजीवनी बनेंगे आकाश
लोकसभा चुनावों के दौरान और उसके बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन, सांगठनिक फेरबदल और कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने जैसी कई मुश्किलें सामने आई थीं. ऐसे में आकाश आनंद की यूपी की राजनीति में वापसी बसपा के लिए सियासी संजीवनी का काम कर सकती है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह कदम पार्टी के भीतर युवाओं को जोड़ने और बहुजन समाज के परंपरागत वोट बैंक को साधने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। 

आकाश आनंद 31 साल के हैं और उसी Gen-Z की श्रेणी में आते हैं, जो पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार व रोजगार के मुद्दे पर जंतर-मंतर में उतरकर आंदोलन किया. विरोध प्रदर्शनों और संसद में इस मुद्दे पर हुए हंगामे के बाद उत्तर प्रदेश में पार्टियां युवा वोटरों तक पहुंचने की सपा और कांग्रेस कोशिश कर रही है। 

आकाश आनंद 2024 चुनाव में उन्हीं मुद्दे उठाते हुए नजर आ रहे थे, जिसे लेकर छात्र आज मांग रहे. ऐसे में आकाश आनंद मौजूदा सियासी मिजाज को समझते हुए काफी फिट बैठते हैं, लेकिन बसपा को दोबारा से खड़ा करना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है। 

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