Sunday, August 2, 2026
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17 गांवों की पंचायत का फैसला, परिवार पर लगा सामाजिक बहिष्कार

डुंगरपुर
राजस्थान के डूंगरपुर जिले के रामसागड़ा थाना क्षेत्र से सामाजिक कुरीतियों और खाप पंचायत के तुगलकी फरमान का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक खाप पंचायत के फैसले के कारण एक पीड़ित विधवा महिला और उसकी बेटी पिछले 12 वर्षों से अपने ही घर नहीं लौट पाई हैं और उन्हें दिल्ली में रहकर दिन काटने पड़ रहे हैं। 17 गांवों के पंचों और मुखियों ने मिलकर इस परिवार का सामाजिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद) कर रखा है। अब समाज में वापस शामिल करने के नाम पर पीड़ित परिवार पर 21 लाख रुपए का जुर्माना भरने का भारी दबाव बनाया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत 10 अगस्त 2015 से हुई थी, जब गांव के तीन युवक जन्मदिन मनाने निकले थे और रातभर वापस नहीं लौटे। अगले दिन 11 अगस्त को पुलिस ने एक कुएं से दो युवकों के शव बरामद किए। उदयपुर के मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में मौतों का कारण डूबना बताया गया था।

हालांकि, 12 अगस्त 2015 को मृतकों के परिजनों ने कलेक्ट्रेट परिसर में शव रखकर हंगामा किया और पीड़िता के भाई को हत्या का मुख्य आरोपी बनवा दिया। इसी दौरान गांव के मुखिया और पंचों ने पीड़िता के भाई, पिता और मामा को दोषी मानते हुए उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया। घटना के तीन महीने बाद 17 गांवों की महापंचायत बुलाई गई, जहां इस सामाजिक पाबंदी पर पक्की मुहर लगा दी गई।

क्या कहना है पीड़िता का
पीड़िता के अनुसार, 29 अगस्त 2015 को रक्षाबंधन के दिन मृतकों के परिजनों ने उसकी मां के साथ मारपीट कर उन्हें गांव से खदेड़ दिया। वर्ष 2016 में जब पीड़िता कॉलेज से पढ़ाई कर लौट रही थी, तब बस स्टैंड पर उसके साथ मारपीट और छेड़छाड़ की गई। इस लगातार प्रताड़ना, बेटी की पढ़ाई छूटने और सामाजिक अपमान के सदमे में पीड़िता के पिता का निधन हो गया। मामले में पुलिस ने पीड़िता के भाई का दिल्ली में नार्को टेस्ट भी कराया था, जिसकी रिपोर्ट पूरी तरह से नेगेटिव आई थी। इसके बावजूद परिवार को राहत नहीं मिली।

अपनी आपबीती लेकर पीड़िता ने गुरुवार को जिला कलेक्टर देशलदान को ज्ञापन सौंपा और न्याय की गुहार लगाई। पीड़िता ने बताया कि जब भी वे गांव लौटने की कोशिश करते हैं, तो समाज के तथाकथित 'सुप्रीम लीडर' 21 लाख रुपए नकद जमा कराने और 17 गांवों के लोगों को दावत देने की शर्त रखते हैं। पीड़िता का कहना है कि रामसागड़ा थाना पुलिस में पहले भी परिवाद दिया गया था, लेकिन मामला सिर्फ जांच तक ही सीमित रहा।

क्या कहना है पुलिस का
इस पूरे मामले पर रामसागड़ा थानाधिकारी कैलाश पंचारिया का कहना है कि पीड़ित पक्ष की शिकायत और परिवाद के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले में नियमानुसार अग्रिम अनुसंधान किया जा रहा है।

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