Thursday, July 30, 2026
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Thalapathy Vijay Promise: स्कूलों में हर हफ्ते चिकन बिरयानी देने का ऐलान, TVK सरकार की बड़ी तैयारी

चेन्नई 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय जल्द ही स्कूली बच्चों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं। चर्चा है कि विजय की TVK सरकार स्कूली बच्चों को हर हफ्ते चिकन बिरयानी देने की तैयारी कर रही है। इस मामले में एक प्रस्ताव पर समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इसे धरातल पर उतारा जा सकता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना को लागू करने के लिए तमिलनाडु की स्कूली पोषण योजना में बदलाव किया जाएगा। नए बदलावों में सरकारी स्कूलों के छात्रों को हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी परोसने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन ने बीते दिनों यह विचार मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के सामने रख दिया है।

क्या बोले शिक्षा मंत्री?
प्रस्ताव पर बात करते हुए स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन ने तमिलनाडु के सियासी इतिहास और बच्चों के लिए पूर्व में मौजूद पोषण कार्यक्रमों का जिक्र किया। राजमोहन ने कहा, "के कामराज ने मिड-डे मील योजना की शुरुआत की, कलाईग्नार करुणानिधि ने इसमें अंडे जोड़े, एमजीआर (MGR) ने इसे 'न्यूट्रिशियस मील प्रोग्राम' में बदला और जयललिता ने पूरे हफ्ते अंडे बांटने की व्यवस्था की। इसी तरह, मेरी भी इच्छा है कि हमारी सरकार के तहत सरकारी स्कूलों में हफ्ते में एक दिन छात्रों को चिकन बिरयानी दी जाए।" रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि मुख्यमंत्री विजय इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं और फिलहाल अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है।

सुबह के नाश्ते के मेन्यू में भी होगा बदलाव
राज्य में दोपहर के खाने में बदलाव के अलावा पेरुंतलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम के मेन्यू को भी नया रूप देने की योजना बनाई है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि फिलहाल हर छात्र के लिए करीब 15 रुपये का बजट तय है। ऐसे में गेहूं और रवा उपमा जैसे खानों को हटाकर छात्रों को अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प दिए जाएंगे। बता दें कि तमिलनाडु के प्राथमिक स्कूलों में पहले से ही सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन यानी दो वक्त का खाना दिया जाता है।

तमिलनाडु रहा है अग्रणी
गौरतलब है कि देश में मिड डे मील की शुरुआत तमिलनाडु से ही हुई थी। 1950 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज के नेतृत्व में मिड डे मील की शुरुआत की गई थी। इसके बाद आने वाली हर सरकार ने बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने और कुपोषण दूर करने के लिए इसमें लगातार बदलाव किए। अब अगर सीएम विजय इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो यह भारत के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अलग कदम होगा।

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