Tuesday, July 28, 2026
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आजम खान की मुश्किलें बढ़ीं, ‘तनखैया’ बयान मामले में 2 साल की सजा रहेगी कायम

रामपुर
जिलाधिकारी को तनइया बताने के मामले में निचली अदालत से दो साल की सजा के फैसले के खिलाफ सपा नेता आजम खान की अपील सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी है। सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के सजा के फैसले को बरकरार रखा है। सजा का यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का है। आजम खान पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े थे। तब सपा और बसपा का गठबंधन था।

रामपुर लोकसभा सीट सपा को मिली थी। चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने कई बार विवादित बयानबाजी की थी। उनके खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में कई मुकदमे आचार संहिता उल्लंघन के दर्ज हुए थे। चुनाव आयोग ने उनके प्रचार पर भी रोक लगा दी थी। इनमें ही एक मुकदमा थाना भोट में दर्ज हुआ था।

यह मुकदमा तत्कालीन एसडीएम घनश्याम त्रिपाठी की ओर से कराया गया था। इसमें कहा था कि आजम खान का एक वीडियो प्रसारित हुआ था, जिसमें वह वाहन पर खड़े होकर माइक से बोल रहे थे और लोग उनके वाहन के चारों ओर खड़े उन्हें सुन रहे थे। आजम ने कहा था कि डटे रहो। यह कलेक्टर-पलक्टर से मत डरियो। यह तनखइया हैं। तनखइयों से नहीं डरते हैं।

देखे हैं मायावती जी के फोटो। कैसे बड़े-बड़े अफसर रुमाल निकालकर जूते साफ करते हैं। उन्हीं से गठबंधन है। उनके ही जूते साफ कराऊंगा इनसे अल्लाह ने चाहा। इस मुकदमे में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने आजम खान को दोषी मानते हुए 16 मई 2026 को दो साल के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

आजम खान ने सजा के फैसले को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में चुनौती देते हुए अपील दाखिल की थी। आजम खान की ओर से उनके अधिवक्ता विनोद कुमार शर्मा ने अपील पर बहस की थी। राज्य सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने अपील पर आपत्ति दाखिल की थी।

दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद शनिवार को निर्णय सुनाया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अपील खारिज करते हुए न्यायालय ने आजम खान की दोष सिद्धी को बरकरार रखा है। उधर, आजम खान के अधिवक्ता का कहना है कि निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट जाएंगे।

इस मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा सिंह राणा ने बताया कि यह मामला साल 2019 का है. शिकायत तत्कालीन उपजिलाधिकारी घनश्याम त्रिपाठी ने दर्ज कराई गई थी. आरोप है कि थाना भोट क्षेत्र के ग्राम मनकरा में एक चुनावी सभा के दौरान मोहम्मद आजम खान ने अधिकारियों को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि "कलेक्टर-वलेक्टर से मत डरियो, ये तनखैया हैं" इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 

इस मामले में निचली अदालत ने सुनवाई के बाद विभिन्न धाराओं में मोहम्मद आजम खान को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी. साथ ही, प्रत्येक धारा में पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. इस फैसले को चुनौती देते हुए आजम खान ने सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी. जिस पर सेशन कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपील को खारिज कर दिया है और निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह सही मानते हुए दोषसिद्धि और सजा दोनों को बरकरार रखा। 

अधिवक्ता सीमा सिंह राणा ने यह भी कहा कि इस मुकदमे में मोहम्मद आजम खान ही एकमात्र आरोपी थे और उन्हीं की अपील पर आज फैसला सुनाया गया है. अब इस फैसले के बाद कानूनी रूप से मोहम्मद आजम खान के पास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प मौजूद है। 

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