Wednesday, July 29, 2026
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झरिया पुनर्वास क्षेत्र में रोजगार की नई पहल, केंद्र ने शुरू की तैयारी

धनबाद
झरिया मास्टर प्लान (जेएमपी) के तहत पुनर्वासित एवं परियोजना-प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी रोजगार और आजीविका के अवसर विकसित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है।

इसी क्रम में शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें बेलगढ़िया पुनर्वास क्षेत्र में वस्त्र उद्योग (टेक्सटाइल यूनिट) स्थापित करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में कोयला सचिव विक्रम देव दत्त, केंद्रीय कोयला मंत्री के निजी सचिव पंकज जैन, बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन सहित केंद्र सरकार, बीसीसीएल और संबंधित संस्थाओं के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को झरिया मास्टर प्लान के सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

बेलगढ़िया में टेक्सटाइल यूनिट स्थापित करने पर मंथन
बैठक में आदित्य बिड़ला समूह के ग्रुप प्रेसिडेंट (कार्पोरेट अफेयर्स) केवी सुनील तथा राजधानी टेक्सटाइल्स के कार्यकारी निदेशक प्रवेश कोचेता ने भाग लिया।

सभी पक्षों ने बेलगढ़िया पुनर्वास क्षेत्र में वस्त्र उद्योग इकाई स्थापित करने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य झरिया मास्टर प्लान के तहत पुनर्वासित एवं परियोजना-प्रभावित परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार, आय सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है।

महिलाओं और युवाओं को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि प्रस्तावित वस्त्र उद्योग इकाई से पुनर्वासित परिवारों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार तथा नियमित रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।इससे सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया आधार मिलेगा।

बेंगलुरु अध्ययन दौरे का परिणाम बनी नई पहल
बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में गत माह बीसीसीएल के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु का दौरा किया था।

इस दौरान आदित्य बिड़ला लाइफस्टाइल लिमिटेड (एबीएलएल) के अधिकारियों के साथ बेलगढ़िया में वस्त्र उद्योग स्थापित करने, उद्योग आधारित कौशल विकास, संभावित औद्योगिक सहयोग तथा पुनर्वासित एवं परियोजना-प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई थी।

एनआरएससी के साथ सैटेलाइट से होगी झरिया आग की निगरानी
इसी क्रम में नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के साथ एक अलग बैठक भी आयोजित की गई। इसमें झरिया मास्टर प्लान के तहत पुनर्वासित (सेटल्ड) आबादी की सैटेलाइट इमेजिंग के माध्यम से पहचान एवं आकलन तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की सैटेलाइट आधारित निगरानी पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से पुनर्वास प्रक्रिया की प्रभावी मानिटरिंग, जोखिम वाले क्षेत्रों का वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा भविष्य की योजनाओं को अधिक सटीक, पारदर्शी और डेटा-आधारित बनाया जा सकेगा।

पुनर्वास, रोजगार और तकनीक के समन्वय पर सहमति
बैठकों में सभी पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि झरिया मास्टर प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुनर्वास, रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आधुनिक तकनीक के समन्वित उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

उद्देश्य यह है कि परियोजना-प्रभावित एवं पुनर्वासित परिवारों के जीवन स्तर में स्थायी, सकारात्मक और दीर्घकालिक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

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