जयपुर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डी-रेगुलेशन (सीआरडी) फेज-2 के अंतर्गत विभिन्न विभागों में चल रहे सुधारात्मक प्रस्तावों एवं नियामकीय सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य नागरिकों, किसानों, उद्यमियों एवं निवेशकों के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी एवं सुगम बनाते हुए अनावश्यक अनुपालनों एवं नियामकीय जटिलताओं को कम करना है।
मुख्य सचिव ने कहा कि कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डी-रेगुलेशन (सीआरडी) फेज-2 के अंतर्गत किए जा रहे सुधार राज्य में “ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस” तथा “ईज़ ऑफ़ लिविंग” को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने संबंधित विभागों से सुधारात्मक प्रस्तावों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा विभागीय समन्वय के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव द्वारा सीआरडी फेज-2 के अंतर्गत चिन्हित 28 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें से 16 सुधार क्षेत्रों पर भारत सरकार की सहमति प्राप्त हो चुकी है, 6 प्रस्ताव भारत सरकार के स्तर पर विचाराधीन हैं, जबकि शेष 6 सुधारों पर राज्य स्तर पर कार्रवाई जारी है।
बैठक में चेंज इन लैंड यूज़ (सीएलयू) से संबंधित प्रक्रियाओं के सरलीकरण, “परमिटेड अनटिल प्रोहिबिटेड” सिद्धांत के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था विकसित करने तथा मास्टर प्लान तैयार होने की अवधि में भी विकास कार्यों एवं निर्माण स्वीकृतियों को अधिक सुगम बनाने संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों एवं भू-स्वामियों के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सरल एवं व्यवहारिक बनाना है।
उन्होंने लीगल मेट्रोलॉजी के अंतर्गत लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने, सेल्फ डिक्लेरेशन आधारित अनुमोदन व्यवस्था तथा जोखिम आधारित नियामकीय प्रणाली को प्रोत्साहित करने संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा की। इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र में होमस्टे पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने, अनावश्यक एनओसी (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) एवं अन्य अनुपालनों को युक्तिसंगत बनाने तथा गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती पर्यटन सुविधाओं को बढ़ावा देने संबंधी प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने निजी विद्यालयों एवं निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित भूमि, आधारभूत संरचना एवं अन्य नियामकीय प्रावधानों के युक्तिकरण, साझा आधारभूत सुविधाओं के बेहतर उपयोग तथा शिक्षा क्षेत्र में प्रक्रियाओं को अधिक सरल एवं व्यवहारिक बनाने संबंधी प्रस्तावों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नियामकीय सुधारों का उद्देश्य विकास की गति को बढ़ाते हुए जनहित और गुणवत्ता के बीच संतुलन बनाए रखना है।
मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागों को ऐसे सुधारों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिनसे आमजन, उद्योग एवं व्यापार जगत को प्रत्यक्ष लाभ मिले तथा प्रशासनिक प्रक्रियाएँ अधिक सरल, पारदर्शी एवं जनोन्मुख बन सकें।




