Tuesday, July 14, 2026
Google search engine
Homeराज्यउत्तर प्रदेशसीतापुर मॉडल से बदली तस्वीर, यूपी में घटे अनावश्यक रेफरल और बढ़ी...

सीतापुर मॉडल से बदली तस्वीर, यूपी में घटे अनावश्यक रेफरल और बढ़ी सुरक्षित डिलीवरी

 लखनऊ
उत्तर प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की योगी सरकार की मुहिम धरातल पर रंग लाने लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू की गई रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (RRTC) योजना के तहत डॉक्टरों को मिल रहे 'हैंड-ऑन प्रशिक्षण' (व्यावहारिक ट्रेनिंग) ने उनका आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। अब प्रदेश के छोटे जिलों के सरकारी डॉक्टर गंभीर एनीमिया और अत्यधिक हाई बीपी जैसे बेहद जटिल व हाई रिस्क मामलों को बड़े मेडिकल कॉलेजों में रेफर करने के बजाय स्थानीय जिला अस्पतालों में ही खुद सुरक्षित तरीके से संभाल रहे हैं।

20 मेडिकल कॉलेजों को बनाया गया आरआरटीसी सेंटर
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि जिला स्तर पर योग्य चिकित्सक होने के बावजूद पहले गंभीर केसों (जैसे शॉक, एंटी पार्टम हैमरेज, लंबी प्रसव पीड़ा) को संभालने के आत्मविश्वास की कमी के कारण मरीजों को रेफर कर दिया जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर वर्ष 2017 में आरआरटीसी कार्यक्रम डिजाइन किया गया। पहले चरण में राज्य के 20 मेडिकल कॉलेजों को आरआरटीसी सेंटर के रूप में विकसित कर आसपास के जिलों के डॉक्टरों का क्षमता वर्धन किया गया। वर्तमान में दूसरे चरण के तहत हाइब्रिड और व्यावहारिक माध्यमों से डॉक्टरों को विशेषज्ञों की देखरेख में लाइव ट्रेनिंग दी जा रही है।

सीतापुर में 3 महीने में 2218 हाई रिस्क प्रसव, बढ़ा सरकारी अस्पतालों पर भरोसा
इस व्यावहारिक प्रशिक्षण का सबसे बड़ा उदाहरण सीतापुर जिला महिला अस्पताल में देखने को मिला है। यहां ट्रेनिंग प्राप्त महज 5 डॉक्टरों ने पिछले तीन महीनों में 2218 हाई रिस्क प्रसव बिना किसी उच्च केंद्र पर रेफर किए सफलतापूर्वक कराए हैं। डॉक्टरों ने हीमोग्लोबिन का स्तर 2 मिलीग्राम तक गिर जाने और 200 के पार जा चुके ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर आपातकालीन स्थितियों को खुद संभाला। अस्पताल के डॉक्टरों के बढ़ते आत्मविश्वास का ही परिणाम है कि आज से 5 साल पहले जहाँ अस्पताल में रोजाना केवल 2 से 3 सीजेरियन प्रसव होते थे, वहीं अब औसतन 10 से 12 प्रसव प्रतिदिन हो रहे हैं। इस बदलाव के चलते लखीमपुर, शाहजहांपुर, बरेली, बहराइच, गोंडा और हरदोई जैसे पड़ोसी जिलों से भी महिलाएं यहाँ इलाज कराने आ रही हैं।

लखनऊ के वीरांगना अवंती बाई अस्पताल में मातृ मृत्यु दर 90% तक घटी
प्रशिक्षण का सीधा और सकारात्मक प्रभाव लखनऊ के वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल में भी देखने को मिला है, जहां 10 डॉक्टरों के प्रशिक्षित होने के बाद मातृ मृत्यु दर में 80 से 90 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, पहले जहां हर जटिल परिस्थिति में वरिष्ठ डॉक्टरों या मेडिकल कॉलेजों से परामर्श लेना पड़ता था, वहीं अब डॉक्टर दो से तीन मिनट के भीतर त्वरित और सटीक जीवन रक्षक निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम हो चुके हैं।

पूरे प्रदेश में विस्तार की रूपरेखा तैयार
आरआरटीसी की नोडल अधिकारी डॉ सीमा टंडन ने बताया कि वर्तमान में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के तहत सीतापुर, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा व श्रावस्ती तथा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के तहत हाथरस, कासगंज और अलीगढ़ जिला अस्पताल के डॉक्टरों को पूरी तरह प्रशिक्षित किया जा चुका है। क्वीन मैरी अस्पताल की विभागाध्यक्ष और आरआरटीसी मेंटर डॉ. अंजू अग्रवाल के अनुसार, इस कदम से फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRU) से आने वाले अनावश्यक रेफरल मामलों में भारी कमी आई है। सफलता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब प्रदेश के अन्य सभी मंडलों के डॉक्टरों को भी चरणबद्ध तरीके से इस विशेष प्रशिक्षण से जोड़ने का रोडमैप तैयार कर चुका है।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments