Saturday, August 1, 2026
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दिल्ली-एनसीआर की हवा बन रही ‘साइलेंट किलर’, दिल पर पड़ रहा असर

नई दिल्ली

 हर साल सर्दियों में दिल्ली की हवा पराली के धुएं और प्रदूषण से जहरीली हो जाती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि दिल और ब्लड प्रेशर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। एम्स के डॉक्टरों ने कहा है कि पराली जलाने और बढ़ते एयर पल्यूशन का सीधा संबंध हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन से जुड़ा पाया गया है। एम्स और IIT दिल्ली की संयुक्त स्टडी का हवाला देते हुए डॉक्टरों ने बताया कि जिन इलाकों में पराली जलाने का असर ज्यादा था, वहां रहने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा करीब 15 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं PM2.5 प्रदूषण में हर 10 माइक्रोग्राम की बढ़ोतरी की स्थिति में हाइपरटेंशन का खतरा लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ता देखा गया।

 एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अंबुज कुमार ने बताया कि स्टडी में उत्तर भारत के चार राज्यों दिल्ली, पंजाब, यूपी और बिहार के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
इसके लिए 2015-16 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-4) के डेटा का इस्तेमाल किया गया।
अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों ने पिछले 30 दिनों में 100 से ज्यादा फायर इवेंट वाले क्षेत्रों में रहकर धुएं का सामना किया, उनमें हाइपरटेंशन का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा पाया गया।

शोध में बताया गया कि हाई इंटेंसिटी बायोमास बर्निंग वाले इलाकों में रहने वालों में हाइपरटेंशन की संभावना लगभग 15% तक बढ़ जाती है।

डॉक्टर अंबुज ने कहा कि स्टडी में यह भी सामने आया कि हवा की दिशा में आने वाले यानी डाउनविंड क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर इसका असर और ज्यादा गंभीर होता है।

'बायोमास बर्निंग को रोका जाए'
डॉक्टर ने कहा कि खासकर बुजुर्गों में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि यदि बड़े स्तर पर बायोमास बर्निंग को रोका जाए तो उत्तर भारत में अगले पांच वर्षों में करीब 1.73 से 2.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर (PPP आधार पर) की आर्थिक बचत भी संभव है।

हाई BP से सालाना 16 लाख मौतें
डॉक्टर अंबुज ने बताया कि भारत में हर साल करीब 16 लाख लोगों की मौत हाइपरटेंशन के कारण होती है।
यह संख्या टीबी से होने वाली मौतों से पांच गुना ज्यादा है और टीबी, मलेरिया, डेंगू व एचआईवी जैसी कई संक्रामक बीमारियों से होने वाली कुल मौतों से भी अधिक है।
 इसके बावजूद बड़ी चिंता यह है कि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं।
हाइपरटेंशन को 'साइलेंट लेकिन घातक बीमारी' कहा जाता है, क्योंकि 90 प्रतिशत मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते।
कई लोग यह मानते हैं कि सिरदर्द या गुस्सा नहीं आता तो ब्लड प्रेशर नहीं होगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं।
यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग बिना जांच के बीमारी के साथ जी रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर चार में से एक और शहरी क्षेत्रों में हर तीन में से एक व्यक्ति हाइपरटेंशन का शिकार है।

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