Saturday, June 27, 2026
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मोहम्मदगंज सबसे पीछे, सिमडेगा सबसे आगे झारखंड में नल जल योजना की बड़ी खाई उजागर

रांची
झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत चल रही हर घर नल जल योजना की प्रगति चिंताजनक है. देश के 100 सबसे पिछड़े प्रखंडों की सूची में झारखंड के 14 प्रखंड शामिल हैं, जहां पेयजल आपूर्ति की स्थिति खराब है. इन 14 प्रखंडों के कुल 3,40,291 घरों में से अब तक मात्र 29,433 घरों तक ही पाइपलाइन से शुद्ध पेयजल पहुंच सका है. यानी इन क्षेत्रों में औसत प्रगति केवल 8.65 प्रतिशत है.

पलामू का मोहम्मदगंज की स्थिति सबसे बदतर
सबसे बदतर स्थिति पलामू के मोहम्मदगंज प्रखंड की है, जहां 9,823 घरों में से सिर्फ 39 घरों तक ही पानी पहुंच पाया है. योजना के सात वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य के लगभग 27.89 लाख ग्रामीण परिवार आज भी प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में कुल 62.52 लाख घर हैं, जिनमें से अब तक केवल 34.62 लाख घरों (55.38 प्रतिशत) को ही कवर किया जा सका है, जबकि इस योजना का राष्ट्रीय औसत 82.03 प्रतिशत है. इससे झारखंड करीब 26.65 फीसदी पीछे चल रहा है. वर्ष 2019 में शुरू हुई इस योजना की अवधि दिसंबर 2024 में समाप्त हो गई थी, जिसे केंद्र सरकार ने अब बढ़ाकर 2028 तक विस्तार दिया है.

सिमडेगा सबसे आगे
जिलेवार प्रदर्शन की बात करें तो सिमडेगा की स्थिति राष्ट्रीय स्तर से भी बेहतर है. सिमडेगा में 92.93 प्रतिशत घरों (1,30,131 में से 1,20,932 घर) तक पानी पहुंचाया जा चुका है. वहीं, रांची, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में प्रगति 70 प्रतिशत से कम है. राज्य में सबसे खराब स्थिति पाकुड़ जिले की है, जहां मात्र 12.85 प्रतिशत और गोड्डा में केवल 19.33 प्रतिशत घरों तक ही नल का जल पहुंच पाया है.

 

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